बिहार में शराबबंदी के बाद भी क्यों बढ़ा नशा, CJI सूर्यकांत की बड़ी टिप्पणी, बच्चों का नाम लेकर जताई चिंता
CJI सूर्यकांत कहा कि कम उम्र में नशे की लत का असर बच्चे की सेहत तक सीमित नहीं रहता। इससे उसकी पढ़ाई प्रभावित हो सकती है और परिवार के साथ रिश्तों में तनाव पैदा हो सकता है।
Bihar News : बिहार में कई वर्षों से शराबबंदी कानून लागू है, लेकिन बच्चों और किशोरों में मादक पदार्थों की बढ़ती लत को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि बच्चों में नशे की समस्या को केवल स्वास्थ्य या अपराध के नजरिए से नहीं देखा जा सकता। यह उनकी सुरक्षा, शिक्षा, परिवार और भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।
पटना के लोक भवन में 26 सितंबर को पाटलिपुत्र प्रज्ञा प्रवाह श्रृंखला के तहत ‘ड्रग्स से परे बचपन: संरक्षण, देखभाल और पुनर्समावेशन’ विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में CJI सूर्यकांत ने कहा कि नशे की चपेट में आए बच्चों को इलाज के साथ देखभाल, शिक्षा और पुनर्वास की जरूरत है, ताकि उन्हें सामान्य जीवन में वापस लौटने का अवसर मिल सके।
उन्होंने कहा कि कम उम्र में नशे की लत का असर बच्चे की सेहत तक सीमित नहीं रहता। इससे उसकी पढ़ाई प्रभावित हो सकती है और परिवार के साथ रिश्तों में तनाव पैदा हो सकता है। नशे की गिरफ्त में आए बच्चे शोषण, हिंसा, तस्करी और अन्य तरह के दुर्व्यवहार के प्रति भी अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
सिर्फ नशा छुड़ाना पर्याप्त नहीं
CJI ने कहा कि बाल संरक्षण की व्यवस्था को सिर्फ इलाज और नशा छुड़ाने तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है। उपचार के बाद बच्चे को परिवार का सहयोग, स्कूल लौटने का अवसर और समाज में दोबारा अपनी जगह बनाने के लिए जरूरी सहायता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चे को केवल मरीज या अपराध से जोड़कर देखने के बजाय उसकी गरिमा, आत्मसम्मान, अधिकार और भविष्य का भी ध्यान रखना जरूरी है। उपचार पूरा होने के बाद भी सहायता जारी रहनी चाहिए, ताकि बच्चा दोबारा उसी जोखिम भरे माहौल में न लौटे।
परिवार और स्कूल की भी जिम्मेदारी
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि बच्चों को नशे से बचाने की जिम्मेदारी केवल सरकार और पुलिस-प्रशासन की नहीं है। परिवार, स्कूल और समाज को भी मिलकर काम करना होगा। बच्चों को नशे के खतरों के प्रति जागरूक करने और समय रहते मदद उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत करनी होगी।
कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सय्यद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने भी बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा, परिवार और भविष्य को ध्यान में रखते हुए सभी संबंधित पक्षों के समन्वित प्रयास की जरूरत बताई। उन्होंने बच्चों के शोषण और नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर जोर दिया।