पटना GPO और फल मंडी का हाल: सरकारी क्वार्टरों पर माफिया का राज, उठ रहे ख़ाकी पर सवाल?
पटना में अतिक्रमण माफिया का दुस्साहस इतना बढ़ गया है कि सरकारी इमारतों को भी नहीं बख्शा जा रहा है। माफिया द्वारा सरकारी संपत्ति को निजी गोदामों (स्टोर) में तब्दील कर प्रतिदिन लाखों का अवैध व्यापार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री पद की 10वीं बार शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार बिहार की सूरत संवारने के मिशन में जुट गए हैं। राज्य के लगभग सभी बड़े शहरों में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ युद्धस्तर पर अभियान छेड़ा गया है। पटना से लेकर नालंदा और गया से लेकर मुजफ्फरपुर तक, जिला प्रशासन और नगर निगम की टीमें सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा जमाए लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही हैं। अब तक 50 से अधिक चिन्हित स्थानों पर बुलडोजर चलाकर दुकानों और मकानों को जमींदोज किया जा चुका है।
जाम से मुक्ति की कवायद: स्टेशन और अस्पतालों पर फोकस
प्रशासन की इस मुहिम का मुख्य केंद्र वे इलाके हैं जहाँ आम जनता को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों और बड़े अस्पतालों के आसपास के रास्तों को प्राथमिकता के आधार पर साफ किया जा रहा है। छपरा, बेगूसराय, हाजीपुर और सीतामढ़ी जैसे शहरों में इन महत्वपूर्ण ठिकानों के पास अवैध कब्जों के कारण लगने वाले भीषण जाम से राहत दिलाने के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच अतिक्रमण हटाया जा रहा है।
अतिक्रमण माफिया की चुनौती: प्रशासन की नाक के नीचे फिर से कब्जा
सरकार की सख्ती के बावजूद अतिक्रमण माफिया अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। जैसे ही नगर निगम की टीम अभियान खत्म कर लौटती है, माफिया सक्रिय होकर पुराने सिस्टम को दोबारा चालू कर देते हैं। ये लोग न केवल उसी जगह पर फिर से अपनी दुकानें सजा लेते हैं, बल्कि अब इनका दुस्साहस इतना बढ़ गया है कि सरकारी इमारतों को भी नहीं बख्शा जा रहा है। माफिया द्वारा सरकारी संपत्ति को निजी गोदामों (स्टोर) में तब्दील कर प्रतिदिन लाखों का अवैध व्यापार किया जा रहा है।
पटना GPO और फल मंडी का हाल: सरकारी क्वार्टरों पर माफिया का राज
अतिक्रमण माफिया की दबंगई की एक बड़ी बानगी पटना जीपीओ (GPO) के पास देखने को मिली है। विधानसभा की ओर जाने वाली महत्वपूर्ण सड़क फल मंडी के अवैध विस्तार की वजह से हमेशा जाम की चपेट में रहती है। यहाँ रेलवे की जमीन, जहाँ कभी फैमिली क्वार्टर हुआ करते थे, पिछले 6-7 सालों से कथित तौर पर 'शमशेर करीम' जैसे फल माफियाओं के कब्जे में है। ये माफिया सरकारी आवासों को अपने व्यापारिक हितों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे न केवल राजस्व का नुकसान हो रहा है बल्कि सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
BSNL परिसर तक पहुँचा कब्जा: कानून व्यवस्था पर उठते सवाल
अतिक्रमण का जाल अब संचार विभाग के परिसरों तक भी फैल गया है। बीएसएनएल (BSNL) दफ्तर परिसर में स्थित 'नेशनल फेडरेशन ऑफ टेलीकॉम इम्पलाइज' के दफ्तर से सटे क्वार्टरों पर भी माफियाओं ने अपना वर्चस्व कायम कर रखा है। सरकारी अधिकारियों के लिए बने इन क्वार्टरों का इस्तेमाल अब गोदामों के रूप में हो रहा है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इन रसूखदार माफियाओं के चंगुल से सरकारी संपत्ति को कैसे स्थायी रूप से मुक्त कराया जाए, ताकि अभियान केवल 'दिखावा' बनकर न रह जाए।
रिपोर्टर - रंजीत कुमार