Bihar News: गर्लफ्रेंड के लिए खरीदी जमीन? माफियाओं से क्या है रिश्ता? EOU की पूछताछ में फंसे बिहार के भ्रष्ट SDPO गौतम! जानिए पूरी खबर

Bihar News: बिहार का भ्रष्ट एसडीपीओ गौतम कुमार सोमवार को ईओयू के सामने पेश हुआ। इस दौरान ईओयू ने कई तीखे सवाल दागे...गर्लफ्रेंड के लिए जमीन कैसे खरीदें, माफियाओं से क्या रिश्ता है सहित कई सवाल पूछे..

EOU की पूछताछ में फंसे भ्रष्ट SDPO - फोटो : social media

Bihar News: बिहार में आर्थिक अपराध इकाई ने भ्रष्ट एसडीपीओ गौतम कुमार से पूछताछ की। इस पूछताछ में एसडीपीओ गौतम से कई सवाल किए गए। गर्लफ्रेंड के लिए जमीन खरीदने से लेकर भूमाफियाओं से रिश्ता कैसे हैं जैसे कई सख्त सवाल पूछे गए। दरअसल, किशनगंज के पूर्व एसडीपीओ गौतम कुमार से सोमवार को ईओयू ने कथित अवैध संपत्तियों के मामले में गहन पूछताछ की है। सोमवार को नोटिस के आधार पर गौतम कुमार पटना स्थित ईओयू कार्यालय में पेश हुए, जहां करीब पांच घंटे तक उनसे पूछताछ की गई।

महिला मित्र के नाम पर ढाई दर्जन से अधिक जमीन पर सवाल 

ईओयू ने उनसे उनके नाम, पत्नी, परिजनों और महिला मित्रों के नाम पर खरीदी गई ढाई दर्जन से अधिक जमीनों के स्रोत को लेकर सवाल किए। अधिकारियों ने यह जानने की कोशिश की कि इन संपत्तियों की खरीद के लिए धन कहां से आया और किस तरह इसकी व्यवस्था की गई। जांच एजेंसी के अनुसार, पूछताछ के दौरान कुछ अहम जानकारियां सामने आई हैं, जिनका अब सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद गौतम कुमार को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है और इसके लिए उन्हें फिर से नोटिस जारी किया जाएगा।

संपत्तियों को लेकर पूछा गया सवाल 

पूछताछ में पूर्णिया, पटना के अलावा दिल्ली-एनसीआर, पश्चिम बंगाल और नेपाल में मौजूद संपत्तियों को लेकर भी सवाल किए गए। इसके साथ ही थार और क्रेटा जैसी महंगी गाड़ियों, लाखों रुपये के आभूषण और कीमती घड़ियों की खरीद के स्रोत पर भी जवाब मांगा गया। हालांकि, सूत्रों के अनुसार कई सवालों पर गौतम कुमार ने सतही जवाब दिए, जबकि कुछ सवालों को टालने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने बार-बार अपनी खराब तबीयत का हवाला भी दिया।

आज वैभव कुमार से होगी पूछताछ 

इधर, ईओयू ने सहरसा के डीआरडीए निदेशक वैभव कुमार को भी पूछताछ के लिए मंगलवार को तलब किया है। उन्हें 31 मार्च को हुई छापेमारी के दौरान ही नोटिस जारी किया गया था। जांच के दौरान एसडीपीओ के कथित माफिया कनेक्शन पर भी सवाल उठाए गए। ईओयू यह पता लगाने में जुटी है कि लगभग 34 वर्षों की सेवा अवधि में उनकी अधिकांश पोस्टिंग सीमावर्ती जिलों में ही क्यों रही और क्या इसके पीछे किसी प्रभावशाली व्यक्ति या नेटवर्क का हाथ था।