RJD politics: तेजस्वी के नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी पर संकट! राज्यसभा चुनाव में फैसल रहमान के स्टैंड से राजद में मची खलबली, इस कारण RJD को चुप बैठने को किया मजबूर

RJD politics: फैसल रहमान के राज्यसभा चुनाव में मतदान से किनारा करने के फैसले ने राजद के अंदर एक नई खींचतान को जन्म दे दिया है।....

तेजस्वी के नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी पर संकट! - फोटो : social Media

RJD politics: बिहार की सियासत में इस वक्त हलचल तेज है और एक वोट ने पूरे सियासी मंजर को उलझाकर रख दिया है।फैसल रहमान के राज्यसभा चुनाव में मतदान से किनारा करने के फैसले ने राजद के अंदर एक नई खींचतान को जन्म दे दिया है। यह मामला अब महज़ अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि पार्टी की सियासी हैसियत और अस्तित्व का इम्तिहान बन गया है।

राजद के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है क्या पार्टी सख्त कार्रवाई करे या सियासी मजबूरी के तहत खामोश रहे? अगर कार्रवाई होती है, तो संख्या बल में कमी का खतरा है, और इसका सीधा असर तेजस्वी यादव की नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी पर पड़ सकता है। बिहार विधनसभा में यह पद बनाए रखने के लिए कम से कम 25 विधायकों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में एक भी कड़ी कार्रवाई राजद के लिए राजनीतिक जोखिम बन सकती है।

बाहरी तौर पर राजद इस पूरे घटनाक्रम का ठीकरा एनडीए पर फोड़ती नजर आ रही है, मगर अंदरखाने सियासी बेचैनी साफ झलक रही है। पार्टी नेतृत्व हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहा है, क्योंकि एक गलत फैसला सत्ता संतुलन को बिगाड़ सकता है।

फैसल रहमान का यह कदम राजद की आंतरिक एकजुटता पर भी सवालिया निशान खड़ा कर रहा है। अगर इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो आने वाले वक्त में और विधायक भी इसी राह पर चल सकते हैं। यानी यह मामला अब अनुशासन बनाम अस्तित्व की जंग में तब्दील हो चुका है।

राजद के लिए यह वक्त किसी सियासी शतरंज से कम नहीं, जहां हर चाल सोच-समझकर चलनी होगी। एक तरफ पार्टी अनुशासन की साख है, तो दूसरी तरफ विधानसभा में मजबूत उपस्थिति बनाए रखने की मजबूरी। यही वजह है कि फिलहाल पार्टी वेट एंड वॉच की रणनीति अपनाए हुए है।

इस पूरे सियासी घमासान के बीच तेजस्वी यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती संतुलन साधने की है। उन्हें यह तय करना है कि पार्टी की साख बचाएं या सियासी ताकत क्योंकि दोनों को साथ लेकर चलना अब आसान नहीं रहा। बिहार की राजनीति में यह छोटा सा घटनाक्रम एक बड़े सियासी तूफान का इशारा दे रहा है, जहां एक वोट ने पूरी पार्टी को असमंजस के भंवर में धकेल दिया है।