बिहार के 13 विश्वविद्यालयों में संकट: मार्च से बकाया वेतन-पेंशन के भुगतान को लेकर कांग्रेस ने सम्राट सरकार को घेरा
बिहार कांग्रेस ने प्रदेस के 13 विश्वविद्यालयों के 50 हजार से अधिक शिक्षकों, कर्मचारियों और लगभग इतने ही पेंशनभोगियों को मार्च महीने से वेतन व पेंशन न मिलने पर गहरी चिंता व्यक्त की है...
Patna : बिहार के 13 विश्वविद्यालयों के 50 हजार से अधिक शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों और करीब इतने ही पेंशनधारकों का मार्च महीने से वेतन और पेंशन बकाया है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर बिहार प्रदेश कांग्रेस के मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन व मुख्य प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने राज्य सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने मांग की है कि वर्तमान एनडीए सरकार रोकी गई इस राशि का अविलंब भुगतान करे, ताकि इन कर्मियों के सामने खड़ा हुआ जीविकोपार्जन का संकट दूर हो सके।
कांग्रेस ने सरकार की नीयत पर उठाए सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने कड़े शब्दों में कहा कि वर्तमान सरकार की नीयत पूरी तरह से साफ नहीं है। एक तरफ तो सूबे के शिक्षा मंत्री रोज शिक्षा विभाग में सुधार के नाम पर नए-नए नियमों की घोषणा कर रहे हैं और शिक्षकों व कर्मियों को अतिरिक्त दायित्व सौंपे जा रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ उनकी आजीविका को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। सरकार को खाली खजाने के सहारे केवल लोकलुभावन वादे करने के बजाय हर साल पैदा होने वाली वेतन-पेंशन की तंगी की समस्या का एक उचित नियमावली बनाकर स्थायी निदान ढूंढना चाहिए।
मंत्रिमंडल बनाने में व्यस्त एनडीए, कर्मियों के बच्चों की पढ़ाई और शादियां रुकीं
राजेश राठौड़ ने राज्य की राजनीतिक स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि यह बेहद अजीब विडंबना है कि जब से बिहार में नया जनमत आया है, तब से एनडीए शासन सिर्फ मुख्यमंत्री और नया मंत्रिमंडल बनाने के जोड़-तोड़ में ही अपना पूरा जोर लगा रहा है। इधर मार्च से लंबित वेतन और पेंशन के कारण रिटायर्ड पेंशनर्स और कार्यरत कर्मचारी अपने बच्चों के स्कूल-कॉलेज की फीस जमा करने तथा तय तारीखों पर शादी-विवाह संपन्न कराने में असमर्थ हैं। आर्थिक तंगी के कारण बहुत से कर्मियों को तो गर्मी की छुट्टियों में बाहर जाने का अपना प्लान तक रद्द करना पड़ा है।
सिबिल स्कोर खराब होने का खतरा, लोन की पेनाल्टी भरने को मजबूर शिक्षक
कांग्रेस नेता ने इस लेटलतीफी से होने वाले वित्तीय नुकसान को रेखांकित करते हुए कहा कि सबसे बड़ी मुसीबत बैंक लोन और पीएफ (PF) को लेकर खड़ी हो गई है। समय पर वेतन नहीं मिलने से शिक्षकों और कर्मियों के बैंक ईएमआई (EMI) बाउंस हो रहे हैं, जिससे उनका सिबिल स्कोर (CIBIL Score) तो खराब होगा ही, साथ ही उन्हें भारी पेनाल्टी के साथ लोन की अदायगी करनी पड़ रही है। इसके अतिरिक्त, समय पर पीएफ अंशदान जमा न होने से कर्मियों के रिटायरमेंट के वक्त उनके पीएफ अकाउंट में भी बड़ी तकनीकी गड़बड़ियां सामने आएंगी।
सीएम सम्राट और शिक्षा मंत्रियों से अपील, कर्मियों के आत्मसम्मान को न पहुंचाएं ठेस
राजेश राठौड़ ने साफ तौर पर कहा कि जब तक विश्वविद्यालय के शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों के बुनियादी हालात नहीं सुधरेंगे, तब तक बिहार की बदहाल शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार के सुधार की उम्मीद करना बेमानी है। उन्होंने एनडीए सरकार के मुखिया सम्राट चौधरी और दोनों शिक्षा मंत्रियों से अविलंब इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए विश्वविद्यालय के कर्मियों और बुजुर्ग पेंशनर्स के आत्मसम्मान की रक्षा करनी चाहिए और उनके बकाए का तुरंत भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए।
नरोत्तम की रिपोर्ट