Patna Bihta Elevated Road: दानापुर-बिहटा एलिवेटेड रोड पर जमीन का बखेड़ा, रेलवे की अड़ंगेबाज़ी से ठप पड़े 10 पिलर, डीएम का फरमान-कैंप लगाओ और मामला रफा-दफा करो

Patna Bihta Elevated Road: पटना के सबसे भारी इंफ्रास्ट्रक्चर सिंडिकेट (दानापुर-बिहटा एलिवेटेड प्रोजेक्ट) की रफ्तार पर जमीन के पेच और मुआवजे के विवाद ने ब्रेक लगा दिया है।..

दानापुर-बिहटा एलिवेटेड रोड पर जमीन का बखेड़ा- फोटो : social Media

Patna Bihta Elevated Road:  पटना के सबसे भारी इंफ्रास्ट्रक्चर सिंडिकेट (दानापुर-बिहटा एलिवेटेड प्रोजेक्ट) की रफ्तार पर जमीन के पेच और मुआवजे के विवाद ने ब्रेक लगा दिया है। रंग-रूप बदलने की इस महा-योजना में सबसे बड़ा अड़ंगा दानापुर स्टेशन के पास लगा है, जहां रेलवे के अपने अधिकार क्षेत्र  जमीन पर कुंडली मारकर बैठने की वजह से 10 पिलरों का काम अधर में लटका हुआ है। इस गतिरोध (अड़चन) का सीधा खामियाजा स्थानीय पब्लिक को ट्रैफिक जाम के प्रताड़ना के रूप में भुगतना पड़ रहा है।

जब इस प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप की हाई-लेवल बैठक में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) केअधिकारियों ने इस जमीन विवाद का मुद्दा उठाया, तो पटना के डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम फुल एक्शन मोड में आ गए। डीएम ने दानापुर एसडीओ और ट्रैफिक एसपी को साफ हिदायत दी है कि निर्माण साइट पर भारी प्रशासनिक अमला और सुरक्षा सहायता तैनात की जाए ताकि कोई भी बाहरी तत्व काम में खलल न डाल सके।

इसके साथ ही, किसानों के बीच मुआवजे  के धीमे वितरण पर नाराजगी जताते हुए जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को ऑर्डर दिया गया है कि वे तुरंत स्पेशल कैंप लगाएं और पैसों का भुगतान (सेटलमेंट) कर मामले को रफा-दफा करें।1969.39 करोड़ रुपये के इस भारी-भरकम बजट (डीलींग) वाले प्रोजेक्ट में 264.04 करोड़ रुपये सिर्फ जमीन अधिग्रहण (मुआवजे) के खेल पर खर्च होने हैं। 22 मौजा की 104 एकड़ जमीन पर कब्जा लिया जा रहा है, जिसमें से अब तक 972 रैयतों के बीच 194.03 करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं।

 दानापुर से विष्णुपुरा तक 14.4 किलोमीटर और विश्वंभरपुर से ईएसआईसी हॉस्पिटल तक 2.28 किलोमीटर का एलिवेटेड पैच होगा। इनके बीच 5.15 किमी की एट-ग्रेट (जमीनी) सड़क होगी, जो सीधे बिहटा एयरपोर्ट का रास्ता साफ करेगी और यहीं पर टोल प्लाजा  बनेगा।NHAI केअधिकारियों के मुताबिक, इस 17 किलोमीटर के एलिवेटेड रोड को कुल 389 पिलरों के मजबूत कंधों पर टिकाया जाना है। राहत की बात बस इतनी है कि अब तक 4 किलोमीटर के दायरे में स्पैन चढ़ाने का काम ऑपरेशन मुकम्मल हो चुका है, जबकि बाकी के हिस्सों में क्रेन और मशीनें दिन-रात लगी हुई हैं। लेकिन अगर रेलवे ने अपनी जमीन से कब्जा नहीं हटाया, तो तय समय पर इस प्रोजेक्ट का द एंड होना मुश्किल नजर आ रहा है।