Bihar Bureaucracy: नीतीश युग के अंतिम अधिकारी IAS दीपक कुमार कौन हैं जिनकी CMO से हो गई विदाई, सम्राट सरकार ने क्यों किया बड़ा प्रशासनिक फेरबदल,पढ़िए
Bihar Bureaucracy: मुख्यमंत्री सचिवालय से दीपक कुमार का हटाया जाना बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि नीतीश कुमार के कार्यकाल के मुख्यमंत्री सचिवालय से जुड़े वे अंतिम प्रमुख अधिकारियों में से एक थे।
Bihar Bureaucracy: बिहार की ब्यूरोक्रेसी में लंबे समय से अहम भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दीपक कुमार को मुख्यमंत्री कार्यालय से हटाकर अब बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाया गया है। बिहार सरकार के इस प्रशासनिक फेरबदल को मुख्यमंत्री कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दीपक कुमार को सीएम के प्रधान सचिव पद से हटाकर नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकारी अधिसूचना के मुताबिक 1984 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दीपक कुमार बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के रूप में कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से कैबिनेट मंत्री के समकक्ष पद पर रहेंगे। ऐसे समय में उन्हें आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की जिम्मेदारी दी गई है, जब बिहार में बाढ़ और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं को लेकर प्रशासन के सामने बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।
नीतीश सरकार में भी रहा लंबा कार्यकाल
दीपक कुमार बिहार प्रशासन के उन वरिष्ठ अधिकारियों में रहे हैं, जिन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय में लंबे समय तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली। वह पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव रहे और सेवानिवृत्ति के बाद भी मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े रहे।दीपक कुमार ने 31 मई 2018 को बिहार के मुख्य सचिव का पद संभाला था। इससे पहले उनका कार्यकाल समाप्त होने वाला था, लेकिन केंद्र सरकार ने बिहार सरकार के अनुरोध पर उन्हें सेवा विस्तार दिया था। बाद में सक्रिय सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रशासनिक भूमिका दी गई।यही वजह रही कि बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था में दीपक कुमार का नाम लंबे समय तक बेहद प्रभावशाली अधिकारियों में लिया जाता रहा। मुख्यमंत्री बदलने के बाद भी वह मुख्यमंत्री कार्यालय की व्यवस्था का हिस्सा बने रहे। अब सम्राट चौधरी सरकार ने उन्हें नई जिम्मेदारी सौंप दी है। दीपक कुमार को हटाकर सम्राट ने संकेत दिया है कि नई सरकार अपने अनुसार प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति कर रही है।मुख्यमंत्री सचिवालय से दीपक कुमार का हटाया जाना बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि नीतीश कुमार के कार्यकाल के मुख्यमंत्री सचिवालय से जुड़े वे अंतिम प्रमुख अधिकारियों में से एक थे।
बाढ़ के बीच आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी
दीपक कुमार को बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की कमान ऐसे वक्त मिली है, जब बिहार के कई हिस्से बाढ़ की चपेट में हैं। बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण राज्य में आपदा प्रबंधन नीति, राज्य आपदा प्रबंधन योजना और आपदा से बचाव एवं तैयारी से जुड़े कामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी प्राधिकरण के पदेन अध्यक्ष हैं। ऐसे में उपाध्यक्ष के तौर पर दीपक कुमार की नई भूमिका बाढ़, आपदा प्रबंधन, राहत और भविष्य की आपदा तैयारियों के लिहाज से अहम होगी।
जिलाधिकारी से मुख्य सचिव तक का सफर
दीपक कुमार ने अपने प्रशासनिक करियर में बिहार और झारखंड के विभिन्न जिलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। वह हजारीबाग, बक्सर, नालंदा और मोतिहारी जैसे जिलों में जिलाधिकारी रह चुके हैं। इसके अलावा केंद्र में भी उन्होंने महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। वह ESIC के महानिदेशक और NHAI के चेयरमैन जैसे पदों पर भी रहे। बिहार के मुख्य सचिव के तौर पर भी उनका कार्यकाल रहा। इस लंबे प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण प्राधिकरण की जिम्मेदारी उनके अनुभव के अनुरूप मानी जा रही है।
खाली था बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण उपाध्यक्ष का पद
बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष का पद सितंबर में तत्कालीन उपाध्यक्ष उदय कांत मिश्रा का कार्यकाल पूरा होने के बाद खाली हुआ था। इसके बाद से ही इस पद के लिए वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी की तलाश की जा रही थी। अब दीपक कुमार की नियुक्ति के बादबिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को नया नेतृत्व मिल गया है। हालांकि, उनके भविष्य में किसी केंद्रीय या अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारी में जाने की चर्चाएं भी हैं, लेकिन ऐसी किसी संभावित नियुक्ति की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दीपक कुमार की मुख्यमंत्री कार्यालय से विदाई को जहां बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, वहीं बाढ़ के मौजूदा संकट के बीच बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की कमान उनके हाथों में जाना भी खासा अहम है। अब निगाहें इस बात पर होंगी कि नई भूमिका में उनका प्रशासनिक अनुभव बिहार की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को किस तरह दिशा देता है।
-हीरेश कुमार