Dehri-Banjari Rail Line - चार दशक से बंद डेहरी-बंजारी रेलखंड पर फिर दौड़ेगी ट्रेन : रोहतास के औद्योगिक और पर्यटन विकास को लगेंगे पंख, रेलवे ने दी मंजूरी
Dehri-Banjari Rail Line - डेहरी-बंजारी रेलखंड पर 40 साल बाद फिर दौड़ेगी ट्रेन! रेलवे ने 1.11 अरब रुपये की योजना को दी मंजूरी। पर्यटन और उद्योग के लिए गेम-चेंजर साबित होगी यह रेल लाइन।
Dehri - बिहार के रोहतास जिले के लिए एक ऐतिहासिक और सुखद खबर सामने आई है, जहाँ लगभग चार दशकों से बंद पड़ी डेहरी-बंजारी रेल लाइन को फिर से जीवित करने की योजना को रेलवे ने मंजूरी दे दी है । रेलवे ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पहले चरण के तहत 36.4 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के निर्माण का खाका तैयार किया है, जिस पर लगभग 1 अरब 11 करोड़ 20 लाख रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है । इस रेलखंड के पुनरुद्धार से न केवल स्थानीय लोगों का दशकों पुराना सपना पूरा होगा, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर भी पूरी तरह बदल जाएगी।
गौरवशाली इतिहास और 'औद्योगिक लाइफलाइन'
इस रेलखंड का इतिहास अत्यंत समृद्ध रहा है और इसकी शुरुआत वर्ष 1911 में डेहरी-रोहतास लाइट रेलवे (DRLR) के रूप में हुई थी । चार दशक पहले तक यह रेल लाइन डालमियानगर स्थित रोहतास इंडस्ट्रीज के लिए 'औद्योगिक लाइफलाइन' मानी जाती थी, जिसके जरिए सीमेंट फैक्ट्री के लिए चूना पत्थर और कागज उद्योग के लिए बांस की ढुलाई की जाती थी । वर्ष 1913-14 के दौर में इस मार्ग पर सालाना 50 हजार से अधिक यात्री सफर करते थे और 90 हजार टन से ज्यादा माल की ढुलाई होती थी ।
लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद मिली सफलता
इस परियोजना को फिर से शुरू करने की घोषणा वर्ष 2008 में ही की गई थी, लेकिन पिछले कई वर्षों तक यह फाइल ठंडे बस्ते में रही और बजट में केवल प्रतीकात्मक राशि ही आवंटित की जाती थी । अब तक इस परियोजना के सर्वे और अन्य प्रारंभिक कार्यों पर 7 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं । वर्ष 2024 में "टीम डेहरियांस" के अध्यक्ष चंदन कुमार द्वारा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और रेल मंत्री को सौंपे गए ज्ञापन के बाद इस ठप पड़ी योजना में नई जान फूँकी गई और अब इसे आधिकारिक मंजूरी मिल गई है ।
पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक आसान होगी पहुँच
इस रेल लाइन के दोबारा शुरू होने से रोहतास जिले के पर्यटन मानचित्र को एक नया आयाम मिलेगा । रेल सेवा बहाल होने से ऐतिहासिक रोहतासगढ़ किला, प्रसिद्ध तुतला भवानी मंदिर, रोहितेश्वर मंदिर, कशिश वाटर फॉल और महादेव खोह जैसे प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक पर्यटकों की पहुँच बेहद आसान हो जाएगी । इससे न केवल सैलानियों की संख्या में भारी वृद्धि होगी, बल्कि क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को भी राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
रोजगार और व्यापार के खुलेंगे नए द्वार
परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र में रोजगार, व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है । खनिज संसाधनों की सुगम ढुलाई से नए उद्योगों के रास्ते खुलेंगे और स्थानीय स्तर पर हजारों लोगों के लिए अप्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे । वर्तमान वित्तीय वर्ष में केंद्र सरकार ने पुनः सर्वे के लिए 0.06 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है, जिससे स्पष्ट है कि अब सरकार इस 'गेम-चेंजर' प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है ।