Middle East War: गैस की किल्लत से बिहार लौटते मजदूरों का दर्द, ‘वहां काम नहीं, यहां मजबूरी है’

Middle East War: पश्चिम एशिया जंग का असर देश में देखने को मिल रहा है। देश में जारी एलपीजी दिक्कत की वजह से सैकड़ों की संख्या में मजदूर बिहार लौट रहे हैं।

Middle East War
मजदूरों की वापसी ने खड़े किए सवाल- फोटो : social media

Middle East War: पश्चिम एशिया में चल रही जंग का असर अब भारत में भी दिखने लगा है। एलपीजी की दिक्कत के कारण बिहार के कई प्रवासी मजदूर, जो देश के अलग-अलग शहरों में काम कर रहे थे, अपने गांव लौटने को मजबूर हो गए हैं। इस वजह से ट्रेनों में भीड़ बढ़ गई है और पटना रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में मजदूर पहुंच रहे हैं।

पंजाब और दिल्ली से लौटे मजदूरों ने बताया कि शहरों में गैस मिलना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा था। कई लोगों को गैस भरवाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा था, जबकि कुछ ने कहा कि गैस काला बाजार में बहुत महंगे दाम पर मिल रही थी, जिसे वे खरीद नहीं सकते थे।

गैस न मिलने के कारण छोड़ी नौकरी

मजदूरों का कहना है कि गैस नहीं मिलने के कारण उन्हें अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी और अब वे गांव लौट आए हैं, जहां कम से कम लकड़ी या मिट्टी के चूल्हे पर खाना बना सकते हैं। पेंटर का काम करने वाले सुनील ने बताया कि उनकी रोज की कमाई इतनी नहीं है कि महंगा सिलेंडर खरीद सकें। उन्होंने कहा कि पेट्रोल भी या तो मिल नहीं रहा या बहुत महंगा है। अगर मिलता भी है तो 300-400 रुपये किलो तक बताया जा रहा है, जबकि उनकी कमाई 400-500 रुपये रोज की है, ऐसे में घर खर्च चलाना मुश्किल हो गया था।

 जंगल से लकड़ी लाकर खाना बनाया

एक अन्य मजदूर मोहम्मद आलम खान ने कहा कि हालात बहुत खराब हैं। उन्होंने बताया कि कई बार उन्हें जंगल से लकड़ी लाकर खाना बनाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि हर जगह यही समस्या है और गरीब लोग काला बाजार से महंगा गैस नहीं खरीद सकते। नई दिल्ली से आए गजेंद्र कुमार ने कहा कि गैस सिर्फ काला बाजार में मिल रही है और इसकी कीमत करीब 4000 रुपये तक पहुंच गई है। ऐसे हालात में उन्हें अपना काम छोड़कर गांव लौटना पड़ा, जहां कम से कम लकड़ी मिल जाती है।

पंजाब से आए आदमी का बयान

पंजाब से आए देवानंद कुमार ने भी बताया कि गैस की कमी के कारण शहर में रहना मुश्किल हो गया था। पेट्रोल के लिए लंबी लाइन लगानी पड़ती थी और जरूरी चीजें मिलना मुश्किल हो गया था, इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी। रिंकी कुमारी नाम की महिला ने बताया कि उनके तीन बच्चे हैं और इतनी महंगी गैस खरीदना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि शहर में न गैस मिल रही है और न लकड़ी, इसलिए उन्हें गांव लौटना पड़ा जहां किसी तरह गुजारा हो सकता है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय का बयान

हालांकि, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा है कि सरकार पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की सप्लाई बनाए रखने के लिए पूरी कोशिश कर रही है। लोगों से कहा गया है कि घबराकर ज्यादा खरीदारी न करें और एलपीजी की बेवजह बुकिंग न करें। मंत्रालय ने यह भी बताया कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण सप्लाई प्रभावित जरूर हुई है, लेकिन डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर किसी बड़ी कमी की जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि हाल में ऑनलाइन एलपीजी बुकिंग में 94 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और डिलीवरी सिस्टम को बेहतर बनाया गया है। सरकार के मुताबिक 4 अप्रैल 2026 को करीब 55 लाख घरेलू एलपीजी सिलेंडर वितरित किए गए और डिलीवरी को सुरक्षित बनाने के लिए कोड सिस्टम का इस्तेमाल भी बढ़ाया गया है।