Bihar News : पालि और प्राकृत के 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' पर पुनर्विचार करे केंद्र सरकार, मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने बिहार से जोड़ने का किया आग्रह

Bihar News : भारत सरकार द्वारा शास्त्रीय भाषाओं के पांच 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' स्थापित करने के निर्णय पर बिहार सरकार के मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने प्रतिक्रिया व्यक्त की है......पढ़िए आगे

'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' पर पुनर्विचार की मांग- फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा शास्त्रीय भाषाओं के अध्ययन, शोध, संरक्षण और डिजिटाइजेशन के लिए पांच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का निर्णय महत्वपूर्ण पहल है। 1 अक्टूबर 2026 के कार्यालय ज्ञापन के अनुसार पालि का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस केंद्रीय विश्वविद्यालय ओडिशा और प्राकृत का केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात में स्थापित किया जा रहा है। 

बिहार सरकार के मंत्री और हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ संतोष कुमार सुमन ने कहा की मेरा आग्रह है कि पालि और प्राकृत की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक जड़ों को ध्यान में रखते हुए बिहार, विशेषकर मगध क्षेत्र को भी इस महत्वपूर्ण अकादमिक पहल से जोड़ा जाए। पालि-प्राकृत का इतिहास केवल पुस्तकों और अभिलेखों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी गहरी कड़ियां उस मगध की धरती से जुड़ी हैं, जिसने भारत की बौद्ध, जैन और प्राचीन ज्ञान परंपरा को विश्व तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नालंदा, राजगीर, गया, पाटलिपुत्र और वैशाली जैसे ऐतिहासिक स्थलों की विरासत इस क्षेत्र के महत्व को और रेखांकित करती है।

कहा की बिहार में पालि-प्राकृत के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना केवल एक विश्वविद्यालय को केंद्र देने का विषय नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन भाषायी और ज्ञान परंपरा को उसके ऐतिहासिक भूगोल से जोड़ने का विषय है। दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय अथवा नालंदा विश्वविद्यालय जैसे संस्थान इसके लिए मजबूत अकादमिक आधार प्रदान कर सकते हैं। इससे शोध, पांडुलिपियों के संरक्षण, डिजिटाइजेशन, अनुवाद और नई पीढ़ी के बीच प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को पहुंचाने को नई दिशा मिलेगी।

मंत्री ने कहा की मैं भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय से आग्रह करता हूं कि बिहार और विशेषकर मगध की ऐतिहासिक भूमिका को ध्यान में रखते हुए पालि-प्राकृत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के संबंध में पुनर्विचार किया जाए। मगध की धरती को उसकी भाषायी और सांस्कृतिक विरासत के अनुरूप यह अकादमिक सम्मान मिलना हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण की दिशा में एक सार्थक कदम होगा।