बिहार में धान खरीद का लक्ष्य 35 लाख से बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन करने की मांग, मंत्री अशोक चौधरी ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को लिखा पत्र

बिहार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी ने राज्य में निर्धारित धान खरीद का लक्ष्य 35 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन करने की पुरजोर मांग की है। इसे लेकर उन्होंने केन्द्रीय मंत्री को पत्र लिखा है....

मंत्री अशोक चौधरी - फोटो : फाइल फोटो

Patna : बिहार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी ने खरीफ विपणन मौसम 2026-27 के लिए राज्य में निर्धारित धान खरीद का लक्ष्य 35 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन करने की पुरजोर मांग की है। इस संबंध में उन्होंने भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी को एक औपचारिक पत्र भेजकर आवश्यक स्वीकृति जल्द से जल्द प्रदान करने का आग्रह किया है।


उत्पादन बढ़ने के बावजूद खरीद का लक्ष्य घटने पर जताई चिंता

मंत्री अशोक चौधरी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि राज्य में धान का अनुमानित उत्पादन लगातार बढ़ रहा है, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा खरीद का लक्ष्य घटाया जा रहा है। वर्ष 2023-24 में 133.26 लाख मीट्रिक टन उत्पादन पर 45 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य था, जो वर्ष 2026-27 में उत्पादन बढ़कर 154.39 लाख मीट्रिक टन होने के बावजूद घटकर मात्र 35 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य ने पिछले वर्ष (2025-26) में निर्धारित लक्ष्य का 99.84 प्रतिशत धान खरीदकर अपनी क्षमता को साबित किया है।


औसत खरीद के बजाय अनुमानित उत्पादन को आधार बनाने का सुझाव

श्री चौधरी ने कहा कि पिछले तीन वर्षों की औसत खरीद उपलब्धि के आधार पर लक्ष्य तय करने की वर्तमान व्यवस्था बिहार जैसे बढ़ते उत्पादन वाले राज्य के लिए बाधक साबित हो रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि खरीद लक्ष्य निर्धारण का आधार पिछले तीन वर्षों के औसत की जगह राज्य के कुल 'अनुमानित धान उत्पादन' को बनाया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ मिल सके।


राज्य की स्थानीय आवश्यकताओं और आत्मनिर्भरता पर जोर

मंत्री ने स्पष्ट किया कि बिहार में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत जन वितरण प्रणाली के लिए हर साल लगभग 33.16 लाख मीट्रिक टन चावल (लगभग 48.87 लाख मीट्रिक टन धान) की आवश्यकता होती है। यदि केंद्र सरकार 50 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य मंजूर करती है, तो बिहार अपनी खाद्यान्न जरूरतों को स्थानीय स्तर पर पूरा कर आत्मनिर्भर बन सकेगा और दूसरे राज्यों से चावल परिवहन करने में होने वाले अतिरिक्त खर्च की भी बचत होगी।


किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से वंचित होने से बचाने की अपील

अशोक चौधरी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वर्तमान 35 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य राज्य की वास्तविक आवश्यकताओं और किसानों के हित के अनुरूप नहीं है। यदि लक्ष्य नहीं बढ़ाया गया तो राज्य के बड़ी संख्या में किसान भारत सरकार द्वारा घोषित MSP पर अपनी फसल बेचने से वंचित रह जाएंगे। इसलिए उन्होंने भारत सरकार से शीघ्र 50 लाख मीट्रिक टन धान खरीद के लक्ष्य को हरी झंडी देने की अपील की है।


रोहित की रिपोर्ट