Bihar News : बिहार में जीविका दीदियों का बढ़ेगा मान, 'दीदी अधिकार केंद्र' देंगे कानूनी सुरक्षा, हर समस्या का होगा समाधान

Bihar News : बिहार में जीविका दीदियों को सरकार ने सौगात दिया है. उनके लिए 'दीदी अधिकार केंद्र' बनाये गए है. जहाँ उन्हें कानूनी सुरक्षा दी जाएगी.......पढ़िए आगे

जीविका दीदीयों को सुरक्षा - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली जीविका दीदियों को अब अपने हक और न्याय के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। राज्य सरकार के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में 'दीदी अधिकार केंद्र' का संचालन शुरू किया गया है, जो इन दीदियों के लिए सुरक्षा कवच और कानूनी सलाहकार के रूप में कार्य कर रहे हैं।

हिंसा और शोषण के खिलाफ बनीं मजबूत

इन केंद्रों की स्थापना का मुख्य उद्देश्य जीविका दीदियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उनके साथ होने वाली किसी भी प्रकार की हिंसक या अन्यायपूर्ण घटनाओं में उन्हें न्याय दिलाना है। यहाँ दीदियां न केवल विशेषज्ञ कानूनी सलाह प्राप्त कर रही हैं, बल्कि अपने दैनिक कामकाज में आने वाली बाधाओं का समाधान भी पा रही हैं। अब ग्रामीण महिलाएं "डर नहीं, अधिकार की बात" के मंत्र के साथ आगे बढ़ रही हैं।

CNLU पटना संभालेगा कानूनी कमान

दीदी अधिकार केंद्रों की सबसे बड़ी विशेषता इनका प्रबंधन है। इन केंद्रों का सीधा नियंत्रण चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (सीएनएलयू), पटना द्वारा किया जा रहा है। विश्वविद्यालय के नियंत्रण कक्ष से दीदियों की जरूरत के अनुसार अनुभवी कानूनी सलाहकार उपलब्ध कराए जाते हैं। प्रत्येक केंद्र पर समूह की अनुशंसा के आधार पर सात सदस्यों की तैनाती की गई है, जो स्थानीय स्तर पर दीदियों की समस्याओं को सुनकर उनका निराकरण करते हैं।

राज्य भर में विस्तार की योजना

जीविका अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में पूरे बिहार में 256 जीविका दीदी अधिकार केंद्र सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। सरकार ने इनके सफल परिणामों को देखते हुए विस्तार की योजना को मंजूरी दे दी है। इस वित्तीय वर्ष के अंत तक इन केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 421 करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि राज्य के हर कोने की जीविका दीदी को इस सुविधा का लाभ मिल सके।

सशक्तिकरण की नई मिसाल

दीदी अधिकार केंद्र सिर्फ एक सहायता केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास का प्रतीक बनकर उभरे हैं। जमीन विवाद, घरेलू हिंसा या बैंक और समूह से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए अब दीदियों के पास अपना एक समर्पित मंच है। यह पहल बिहार में महिला सशक्तिकरण और न्याय सुलभ कराने की दिशा में एक मिल का पत्थर साबित हो रही है।