जमीन विवादों पर सरकार का 'डिजिटल प्रहार': बिचौलियों का धंधा बंद, अब ऑनलाइन डाउनलोड करें विधिक रूप से मान्य दस्तावेज

बिहार में जमीन से जुड़े विवादों और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब जमीन के दस्तावेजों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने और 'चिरकूट' के झंझट से मुक्ति मिल गई है।

Patna - बिहार सरकार ने जमीन के दस्तावेजों को प्राप्त करने की दशकों पुरानी भौतिक प्रणाली (Physical System) को पूरी तरह बंद कर दिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के नए आदेश के अनुसार, अब अंचल कार्यालयों से कागजात की भौतिक प्रति निर्गत नहीं की जाएगी। इसके स्थान पर अब केवल डिजिटल हस्ताक्षरित (Digitally Signed) कॉपी ही जारी होगी, जो विधिक रूप से पूरी तरह मान्य होगी।

न चिरकूट की जरूरत, न दफ्तर के चक्कर 

अब तक भू-स्वामियों को जमीन के कागजात के लिए कार्यालय जाकर आवेदन देना पड़ता था और 'चिरकूट' (रसीद) संभालकर रखनी पड़ती थी। नई व्यवस्था के तहत अब भू-अभिलेख पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदकों को अब नाम-पता भरने या रसीद लेकर बार-बार कार्यालय दौड़ने की जरूरत नहीं होगी। विभागीय सचिव ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों (समाहर्ताओं) को कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं।

बैंक और कोर्ट में पूरी तरह वैध 

डिजिटल प्रणाली के तहत अब जमाबंदी, खतियान, खेसरा और दाखिल-खारिज समेत भूमि से जुड़े सभी अभिलेख ऑनलाइन प्राप्त किए जा सकेंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ये डिजिटल कॉपियां बैंक, न्यायालय और अन्य सभी सरकारी व गैर-सरकारी संस्थानों में मूल प्रति की तरह ही स्वीकार की जाएंगी। इससे आम लोगों को समय और श्रम की बड़ी बचत होगी।

पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर प्रहार 

राज्य में राजस्व अभिलेखों की स्कैनिंग का कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है। यदि कोई अभिलेख ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है, तो भू-स्वामी पोर्टल पर उसकी मांग दर्ज कर सकते हैं, जिसे विभाग शीघ्र अपलोड करेगा। इस पहल का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को होगा जो रोजगार के कारण अपने पैतृक गांव से दूर रहते हैं और जमीन के कागजात के लिए दलालों या बिचौलियों के चंगुल में फंस जाते थे।

डिजिटल बिहार की ओर बड़ा कदम 

इस नई व्यवस्था से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि जमीन संबंधी विवादों में भी कमी आएगी। विभाग का मानना है कि जब दस्तावेज सीधे भू-स्वामी के हाथ में डिजिटल रूप में होंगे, तो हेर-फेर की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। यह कदम 'सबका सम्मान-जीवन आसान' के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।