Bihar Politics: नीतीश युग का पर्दा गिरने को तैयार! पटना से दिल्ली तक सियासी हलचल, अगला मुख्यमंत्री कौन? पर गरमाया दिल्ली दरबार

Bihar Politics: सियासी शतरंज की बिसात पर नई चालें चल चुकी हैं और सबसे बड़ा सवाल बन गया है आखिर बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?...

पटना से दिल्ली तक सियासी हलचल, अगला मुख्यमंत्री कौन?- फोटो : social Media

Bihar Politics: बिहार की सियासत एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी हुई है, जहां एक युग के अंत और नए दौर की शुरुआत की दस्तक साफ सुनाई दे रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद अब पूरे सूबे की निगाहें 16 मार्च को होने वाली वोटिंग पर टिक गई हैं। सियासी गलियारों में लगभग तय माना जा रहा है कि इसके बाद सुशासन बाबू दिल्ली की राह पकड़ेंगे और पटना की सत्ता किसी नए चेहरे के हाथों में जाएगी।

हालांकि इस फैसले ने जदयू के अंदर हलचल मचा दी है। पार्टी के कई कार्यकर्ता और पुराने समर्थक इस फैसले से नाराज बताए जा रहे हैं। उनके लिए दो दशकों से बिहार की राजनीति का मतलब ही नीतीश कुमार था। मगर अब सियासी शतरंज की बिसात पर नई चालें चल चुकी हैं और सबसे बड़ा सवाल बन गया है आखिर बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?

खबरों के मुताबिक नीतीश कुमार 10 मार्च तक मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं। इसके बाद सत्ता की कमान भारतीय जनता पार्टी के हाथों में जाने की चर्चा तेज है। पटना से लेकर दिल्ली तक लगातार बैठकों और मंथन का दौर जारी है। भाजपा के भीतर मुख्यमंत्री पद के लिए कई नाम सियासी हवा में तैर रहे हैं।

इनमें सबसे मजबूत दावेदार के तौर पर सम्राट चौधरी का नाम उभरकर सामने आ रहा है। इसके अलावा विजय चौधरी, संजीव चौरसिया, नित्यानंद राय और श्रेयसी सिंह जैसे नेताओं के नाम भी सियासी हलकों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। हालांकि अंतिम फैसला भाजपा आलाकमान के दरबार से ही आएगा।

इधर इस बदलते सत्ता समीकरण के बीच एक और दिलचस्प चर्चा जोर पकड़ रही है नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की संभावित राजनीतिक एंट्री। सियासी सूत्रों के मुताबिक उन्हें सरकार में अहम जिम्मेदारी के साथ-साथ संगठन में भी बड़ी भूमिका मिल सकती है।

बताया जा रहा है कि नए फार्मूले के तहत जदयू कोटे से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं। इन संभावित नामों में निशांत कुमार और विजय चौधरी सबसे आगे बताए जा रहे हैं।

अगर ऐसा होता है तो बिहार की राजनीति में यह सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं होगा, बल्कि पूरी सियासी तस्वीर बदलने वाला नया अध्याय साबित हो सकता है। साफ है—पटना की सियासत में अब असली खेल शुरू हो चुका है।