बिजली संकट का अंत! लखीसराय में तैयार हुआ सौर ऊर्जा का 'पावर बैंक', 2027 तक 301 मेगावाट का होगा धमाका! हुआ ऐतिहासिक समझौता

ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और हरित बनाने की दिशा में बुधवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया। पटना में आयोजित कार्यक्रम में लखीसराय के कजरा सौर ऊर्जा संयंत्र से उत्पादित बिजली की आपूर्ति के लिए 'विद्युत क्रय एकरारनामा' (PPA) पर हस्ताक्षर किए गए।

Patna - बिहार को बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बुधवार को एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया गया। राजधानी पटना में ऊर्जा मंत्री श्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव की गरिमामयी उपस्थिति में 'कजरा सौर परियोजना' से उत्पादित बिजली की आपूर्ति के लिए विद्युत क्रय एकरारनामा (PPA) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर मंत्री ने राज्य के ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती देने के लिए 50 हजार करोड़ रुपये के निवेश की बड़ी जानकारी साझा की। 

कजरा सौर परियोजना से निर्बाध बिजली का रास्ता साफ

लखीसराय जिले के कजरा में स्थापित 185 मेगावाट सौर ऊर्जा सह 282 मेगावाट-ऑवर बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजना अब व्यावसायिक संचालन की ओर बढ़ चुकी है। बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड और बिजली वितरण कंपनियों के बीच हुए इस समझौते से राज्य में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के दौर में सौर ऊर्जा का यह कदम न केवल राज्य को रोशन करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा। 

बैटरी स्टोरेज से पीक डिमांड में मिलेगी राहत

कजरा परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका बैटरी ऊर्जा भंडारण (BESS) है। प्रथम चरण में 282 मेगावाट-ऑवर की क्षमता विकसित की गई है, जो पीक ऑवर्स (जब बिजली की मांग सबसे ज्यादा हो) के दौरान ग्रिड को स्थिरता प्रदान करेगी। परियोजना के दूसरे चरण में ₹1,055 करोड़ की लागत से 116 मेगावाट सौर ऊर्जा और जोड़ी जाएगी। जनवरी 2027 तक इस संयंत्र की कुल क्षमता 301 मेगावाट सौर ऊर्जा और 523 मेगावाट-ऑवर बैटरी भंडारण तक पहुंच जाएगी। 

'The Power Year 2025' बुकलेट का विमोचन

कार्यक्रम के दौरान ऊर्जा मंत्री ने ऊर्जा प्रक्षेत्र की प्रमुख उपलब्धियों पर आधारित एक विशेष बुकलेट 'The Power Year 2025 - Bihar Energy Highlights' का विमोचन किया। ऊर्जा सचिव श्री मनोज कुमार सिंह ने बताया कि पिछले एक वर्ष में विभाग ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, उनका विस्तृत विवरण इस बुकलेट में दिया गया है। उन्होंने कहा कि समय पर कार्यों को पूरा करना विभाग की प्राथमिकता है, जिसका प्रमाण कजरा परियोजना का मात्र 18 महीने के भीतर ग्रिड से जुड़ना है। 

पीरपैंती थर्मल पावर प्लांट को जन-समर्थन

ऊर्जा सचिव ने पीरपैंती थर्मल पावर प्लांट की प्रगति पर भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा आयोजित जनसुनवाई में करीब 3500 स्थानीय लोगों ने इस प्लांट के निर्माण का स्वागत करते हुए अपनी सहमति दी है। यह ऐतिहासिक जन-समर्थन दर्शाता है कि राज्य की जनता विकास कार्यों और ऊर्जा प्रक्षेत्र में हो रहे सुधारों के साथ मजबूती से खड़ी है। 

ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बिहार का बड़ा कदम

साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के एमडी श्री महेंद्र कुमार ने इस समझौते को बिहार की जनता से किए गए वादे की पूर्ति बताया। उन्होंने कहा कि 1 जुलाई 2024 को कार्यादेश जारी होने के बाद रिकॉर्ड समय में 31 दिसंबर 2025 को यह परियोजना 132 केवी ग्रिड से जुड़ गई। इस परियोजना के पूरी तरह कार्यात्मक होने से लखीसराय और उसके आसपास के जिलों में चौबीसों घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।