बिहार बनेगा देश का नया 'पावर हब': ₹78,000 करोड़ के निवेश का रोडमैप तैयार, टाटा और अदानी जैसे दिग्गजों की नजर
बिहार अब अंधेरे से निकलकर देश के औद्योगिक नक्शे पर चमकने को तैयार है। शुक्रवार को पटना में हुई एक हाई-प्रोफाइल बैठक में राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों के लिए ₹78,000 करोड़ के निवेश का महत्वाकांक्षी लक्ष्य साझा किया है।
Patna - बिहार को एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र बनाने की दिशा में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। राजधानी पटना के विद्युत भवन में भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल और ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के बीच एक विशेष बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता ऊर्जा सचिव-सह-सीएमडी (BSPHCL) मनोज कुमार सिंह ने की, जिसमें राज्य के बिजली क्षेत्र के विकास की रणनीतिक दृष्टि और भविष्य के निवेश अवसरों पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार का लक्ष्य राज्य में 24x7 निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण करना है।
देश की दिग्गज कंपनियों ने दिखाई निवेश में रुचि
इस परिचर्चा में टाटा पावर, एनएचपीसी (NHPC), अवाडा ग्रुप और हिटाची एनर्जी जैसी देश की 17 शीर्ष औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान नवीकरणीय ऊर्जा (सौर और BESS), जलविद्युत, स्मार्ट मीटरिंग और ट्रांसमिशन इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं को टटोला गया। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए ऊर्जा सचिव ने भरोसा जताया कि बिहार अगले पांच वर्षों में एक बड़े औद्योगिक हब के रूप में उभरेगा और सरकार हर निवेशक को एक 'टीम' के रूप में पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी।
घाटे से उबरकर मुनाफे में आया बिहार का बिजली क्षेत्र
बिहार का ऊर्जा क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में एक मजबूत निवेश गंतव्य में तब्दील हो चुका है। वित्तीय वर्ष 2022-23 से राज्य की डिस्कॉम और ट्रांसमिशन कंपनियां (BSPTCL) लाभदायक बन चुकी हैं। आंकड़ों के अनुसार, राजस्व संग्रह जो वर्ष 2020 में ₹8,598 करोड़ था, वह वित्तीय वर्ष 2024-25 में बढ़कर ₹17,115 करोड़ तक पहुंच गया है। इसके साथ ही तकनीकी और वाणिज्यिक (AT&C) हानियों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो 35.12% से घटकर अब मात्र 15.54% रह गई है।
भविष्य की बड़ी योजनाएं और ₹78,000 करोड़ का लक्ष्य
राज्य सरकार ने आगामी पांच वर्षों (2026 से 2031) के लिए ₹78,000 करोड़ से अधिक के भारी निवेश की योजना बनाई है। यह निवेश मुख्य रूप से बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए किया जाएगा। ऊर्जा सचिव ने बताया कि विभाग अब ड्रोन-आधारित निगरानी और एआई (AI) चालित प्रणालियों को अपनाने की दिशा में काम कर रहा है ताकि परिचालन दक्षता को बढ़ाया जा सके और उपभोक्ताओं को न्यूनतम टैरिफ पर बिजली उपलब्ध कराई जा सके।
बढ़ती मांग और आत्मनिर्भर बिहार का संकल्प
पिछले एक दशक में बिहार में ऊर्जा की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2013 में जहाँ अधिकतम मांग 1,802 मेगावाट थी, वहीं 2025 में इसके 8,752 मेगावाट तक पहुँचने का अनुमान है। वर्तमान में राज्य 220 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली सेवाएं प्रदान कर रहा है। यह पूरी कवायद माननीय मुख्यमंत्री के 'विकसित एवं आत्मनिर्भर बिहार' के विजन के अनुरूप है, जिसमें बिजली क्षेत्र को एक मजबूत और निवेशक-अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के रूप में विकसित किया जा रहा है।