AEEDO परीक्षा पेपर लीक: मुंगेर-नालंदा में FIR, EOU और SIT का बड़ा एक्शन

बिहार AEEDO परीक्षा पेपर लीक मामले में मुंगेर और नालंदा में FIR दर्ज। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) और एसपी राजेश कुमार के नेतृत्व में SIT करेगी जांच। साइबर यूनिट भी तैनात। पूरी खबर पढ़ें।

मुंगेर-नालंदा में FIR,- फोटो : news 4 nation

बिहार में एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की साख पर सवाल खड़े हो गए हैं। मुंगेर में एडीओ (सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी) परीक्षा में पेपर लीक का बड़ा मामला सामने आया है। AEEDO परीक्षा में पेपर लीक और व्यापक कदाचार की शिकायतों के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की है। इस सिलसिले में मुंगेर और नालंदा जिलों में दो अलग-अलग कांड दर्ज किए गए हैं। मामले की गंभीरता और इसकी अंतर-जिला कड़ियों को देखते हुए, दोनों प्राथमिकियों की जांच की जिम्मेदारी अब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को सौंप दी गई है। EOU अब इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुट गई है ताकि लीक के मूल स्रोत तक पहुँचा जा सके।


एसपी राजेश कुमार के नेतृत्व में एसआईटी का गठन

परीक्षा की पवित्रता से खिलवाड़ करने वाले गिरोह पर शिकंजा कसने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। इस हाई-प्रोफाइल टीम का नेतृत्व एसपी राजेश कुमार करेंगे। एसआईटी में कई अनुभवी डीएसपी, इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टरों को शामिल किया गया है। यह टीम विशेष रूप से तकनीकी साक्ष्य जुटाने और संदिग्ध केंद्रों पर छापेमारी करने के लिए बनाई गई है, जिससे जांच प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।


साइबर यूनिट की तैनाती और उच्च स्तरीय निगरानी

चूंकि आधुनिक पेपर लीक गिरोह डिजिटल माध्यमों का सहारा लेते हैं, इसलिए इस जांच में साइबर सुरक्षा यूनिट के विशेषज्ञों को भी तैनात किया गया है। जांच की शुचिता बनाए रखने के लिए इसकी निगरानी सीधे डीआईजी (DIG) स्तर के अधिकारी करेंगे। साथ ही, जांच की हर प्रगति और नए तथ्यों की विस्तृत रिपोर्ट नियमित अंतराल पर एडीजी (ADG) को भेजी जाएगी, ताकि मुख्यालय से त्वरित दिशा-निर्देश प्राप्त किए जा सकें।


परीक्षा पारदर्शिता और सॉल्वर गैंग पर प्रहार

बिहार सरकार का यह एक्शन राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। एसआईटी को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे न केवल छोटे गुर्गों बल्कि प्रश्नपत्र लीक करने वाले असली 'मास्टरमाइंड' और सॉल्वर गैंग पर भी कड़ी कार्रवाई करें। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य भविष्य की परीक्षाओं के लिए एक नजीर पेश करना और अभ्यर्थियों के भरोसे को बहाल करना है।