Bihar Land: किसानों की दहलीज़ तक पहुंची सरकार, फार्मर रजिस्ट्रेशन हुआ और आसान, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

Bihar Land: बिहार की सियासत में किसान एक बार फिर एजेंडे के केंद्र में हैं। सूबे के किसानों के लिए सरकार ने एक बड़ी और राहतभरी सहूलियत का ऐलान किया है।

किसानों की दहलीज़ तक पहुंची सरकार- फोटो : social Media

Bihar Land: बिहार की सियासत में किसान एक बार फिर एजेंडे के केंद्र में हैं। सूबे के किसानों के लिए सरकार ने एक बड़ी और राहतभरी सहूलियत का ऐलान किया है। अब फार्मर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया और भी आसान कर दी गई है। जो किसान अब तक शिविरों में रजिस्ट्रेशन नहीं करा सके थे, उनके लिए रास्ता खुल गया है। ऐसे किसान अब अपने नजदीकी वसुधा केंद्र पर जाकर फार्मर रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। राज्यभर में इसे लेकर फार्मर रजिस्ट्री का महाअभियान चलाया जा रहा है, जिसमें शिविरों के साथ-साथ वसुधा केंद्रों को भी शामिल किया गया है।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के ज़रिए इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने पोस्ट में लिखा कि अब फार्मर रजिस्ट्रेशन और भी सहज हो गया है और राज्य के सभी वसुधा केंद्रों पर यह सुविधा शुरू हो चुकी है। मंत्री ने दावा किया कि NDA सरकार का संकल्प है कि तकनीक के ज़रिए किसान को सशक्त बनाया जाए और सरकारी योजनाओं का लाभ आख़िरी पंक्ति में खड़े किसान तक पहुंचे।

दरअसल, वसुधा केंद्र बिहार में कॉमन सर्विस सेंटर के तौर पर काम करते हैं, जो ग्रामीण ही नहीं बल्कि शहरी इलाकों में भी डिजिटल इंडिया की रीढ़ बन चुके हैं। इन केंद्रों पर जमीन से जुड़े काम—दाखिल-खारिज, जमाबंदी, जमीन मापी से लेकर आधार, पैन कार्ड, पेंशन, जीएसटी सेवाएं, शिक्षा और सरकारी नौकरियों के आवेदन तक की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसका सीधा फायदा यह है कि आम लोगों को अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते।

सरकार की मंशा है कि सभी किसानों को यूनिक किसान आईडी से जोड़ा जाए, ताकि केंद्र और राज्य सरकार की तमाम योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से सीधे किसानों तक पहुंचे। इसी कड़ी में विजय कुमार सिन्हा ने एग्रीस्टैक के तहत चल रहे फार्मर्स रजिस्ट्रेशन महाअभियान की समीक्षा करते हुए अहम बात कही। उनके मुताबिक रिविजनल सर्वे (आरएस) वाले जिलों का प्रदर्शन कैडस्ट्रल सर्वे (सीएस) वाले जिलों से बेहतर है।

आरएस जिलों में साफ-सुथरे और अपडेटेड जमीन रिकॉर्ड्स के चलते रजिस्ट्रेशन की रफ्तार तेज़ है, जबकि सीएस जिलों में उत्तराधिकार विवाद, ज्वाइंट होल्डिंग और पुराने अभिलेख बड़ी चुनौती बने हुए हैं। उपमुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि आठ से नौ जनवरी के बीच कैमूर, भोजपुर, भागलपुर और वैशाली जैसे आरएस जिलों में रैंकिंग में सुधार हुआ, जबकि नालंदा, पटना, जहानाबाद और जमुई जैसे सीएस जिलों में ठहराव या गिरावट देखी गई।

कुल मिलाकर, सरकार इस पहल को किसान हितैषी सियासत और डिजिटल सुशासन की मिसाल के तौर पर पेश कर रही है, जहां तकनीक के सहारे खेत से लेकर फाइल तक की दूरी कम करने की कोशिश की जा रही है।