पूर्व DGP एस.के. सिंघल EOU की रडार पर:जालसाज के झांसे से लेकर सिपाही बहाली घोटाले तक की पूरी कहानी
बिहार के पूर्व डीजीपी एस.के. सिंघल (संजीव कुमार सिंघल) एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। डीजीपी रहते हुए उन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगे थे, जब एक जालसाज ने पटना हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनकर उन्हें फोन किया और वे झांसे में आ गए।
बिहार के पूर्व डीजीपी एस.के. सिंघल (संजीव कुमार सिंघल) एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। डीजीपी रहते हुए उन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगे थे, जब एक जालसाज ने पटना हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनकर उन्हें फोन किया और वे झांसे में आ गए। आरोप है कि बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के उन्होंने उस व्यक्ति से कई बार बात की, जिससे उनकी कार्यकुशलता और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर बड़े सवाल खड़े हो गए।
आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की रडार पर सिंघल
वर्तमान में बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) इस पूरे परीक्षा घोटाले की गहनता से जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार, ईओयू ने एस.के. सिंघल को लिखित सवालों की एक सूची भेजी है, जिनका जवाब देना उनके लिए अनिवार्य है। यदि उनके उत्तर संतोषजनक नहीं पाए जाते हैं, तो उन्हें व्यक्तिगत पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है, जहाँ उनके ही पूर्व जूनियर अधिकारी उनसे तीखे सवाल पूछेंगे। विभाग के भीतर अब भी उन्हें बचाने की कोशिशों के आरोप लग रहे हैं।
नीतीश सरकार पर 'बचाव' के आरोप
जब यह जालसाजी का मामला सार्वजनिक हुआ और विपक्ष ने घेराबंदी शुरू की, तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विवादित बयान देकर सुर्खियां बटोरी थीं। उन्होंने डीजीपी का बचाव करते हुए कहा था कि "बेचारे का अब रिटायरमेंट होने वाला है।" राजनीतिक विश्लेषकों और विपक्ष ने इसे भ्रष्टाचार और लापरवाही के प्रति सरकार का बेहद नरम रुख बताया, जिससे यह संदेश गया कि रसूखदार अधिकारियों को संरक्षण मिल रहा है।
रिटायरमेंट के बाद मिला बड़ा 'पुरस्कार'
विवादों के बावजूद, डीजीपी पद से सेवानिवृत्त होते ही एस.के. सिंघल को सरकार ने केंद्रीय चयन परिषद (सिपाही बहाली) का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। इस नियुक्ति को लेकर प्रशासनिक गलियारों में काफी चर्चा रही, क्योंकि इसे एक दागी छवि वाले अधिकारी को 'पुरस्कृत' करने के तौर पर देखा गया। सिपाही बहाली जैसे महत्वपूर्ण पद पर उनकी तैनाती ने सरकार की मंशा पर सवालिया निशान लगा दिए।
सिपाही बहाली परीक्षा में बड़ी धांधली
सिंघल के अध्यक्ष रहते हुए साल 2023 की सिपाही बहाली परीक्षा में ऐतिहासिक धांधली और पेपर लीक का मामला सामने आया। जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि प्रश्नपत्र छापने वाले प्रेस से लेकर जिला कोषागार तक में गहरी पैठ और सेटिंग की गई थी। इस घोटाले ने हजारों युवाओं के भविष्य को अधर में लटका दिया और चयन परिषद की पूरी कार्यप्रणाली और एसओपी (SOP) के पालन पर उंगली उठाई।