Patna LPG Crisis:पटना की बस्ती में गैस संकट, सिलेंडर नहीं मिला, तीन हजार परिवार लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने को हैं मजबूर
Patna LPG Crisis: पटना की चमकती सड़कों और ऊंची इमारतों के बीच एक ऐसी सच्चाई भी है जो आम आदमी की मुश्किलों को बयां करती है।...
Patna LPG Crisis: पटना की चमकती सड़कों और ऊंची इमारतों के बीच एक ऐसी सच्चाई भी है जो आम आदमी की मुश्किलों को बयां करती है। राजधानी के कौशल नगर स्लम बस्ती में इन दिनों रसोई गैस की भारी किल्लत ने हजारों लोगों की जिंदगी को फिर से पुराने दौर में धकेल दिया है। यहां करीब तीन हजार परिवारों के लगभग दस हजार लोग रहते हैं। बस्ती के करीब 90 प्रतिशत घरों में गैस कनेक्शन तो है, लेकिन सिलेंडर की आपूर्ति ठप होने के कारण अब हालात यह हैं कि करीब 60 प्रतिशत घरों में लकड़ी के चूल्हे पर खाना बन रहा है।
सुबह होते ही बस्ती की गलियों में एक अलग ही मंजर देखने को मिलता है। महिलाएं हाथ में बोरा या टोकरी लेकर लकड़ी की तलाश में निकल पड़ती हैं। बस्ती के पास स्थित वन विभाग के डिपो के आसपास और खाली जगहों पर जाकर लकड़ी चुनना उनकी रोजमर्रा की मजबूरी बन गई है। कुछ परिवार तो बाजार से पैसे देकर लकड़ी खरीदने को भी विवश हैं।
बस्ती के रहने वाले बताते हैं कि उनका गैस सिलेंडर करीब एक सप्ताह पहले खत्म हो गया था। उन्होंने तुरंत नया सिलेंडर बुक कराया, लेकिन सात दिन से ज्यादा बीत जाने के बावजूद भी भरा हुआ सिलेंडर घर तक नहीं पहुंचा। मजबूरी में उन्होंने घर के बाहर ईंट जोड़कर लकड़ी का चूल्हा बना लिया है, जिस पर अब रोज का खाना पकाया जा रहा है।
इसी बस्ती की बुजुर्ग की परेशानी और भी ज्यादा है। उनका कहना है कि गैस एजेंसी का वेंडर खाली सिलेंडर लेकर चला गया, लेकिन दस दिन से ज्यादा बीतने के बाद भी भरा हुआ सिलेंडर नहीं दिया गया। उम्र अधिक होने के कारण उनके लिए लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाना भी आसान नहीं है, जिससे उन्हें काफी दिक्कत हो रही है।
स्थानीय वार्ड पार्षद आशीष शंकर का कहना है कि गैस की आपूर्ति बाधित होने से बस्ती के लोग बेहद परेशान हैं और मजबूरी में लकड़ी के चूल्हे पर खाना बना रहे हैं। उनका कहना है कि अगर जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो बस्ती के हजारों परिवारों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
राजधानी में गैस की यह किल्लत अब सिर्फ एक सुविधा का संकट नहीं रह गई है, बल्कि यह सवाल खड़ा कर रही है कि आखिर आम आदमी की रसोई कब तक इस तरह की अव्यवस्था की मार झेलती रहेगी।