Bihar News : 'पितृपक्ष में गयाजी का महत्व केवल धार्मिक आस्था नहीं, सनातन परंपरा का प्रतीक': मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन
Bihar News : मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने कहा कि पितृपक्ष में गयाजी का महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति की उस महान परंपरा का प्रतीक है, जिसकी पहचान देश-दुनिया में है।
PATNA : हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (से.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने कहा कि पितृपक्ष के दौरान गयाजी का महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति की उस महान परंपरा का प्रतीक है, जिसकी पहचान वैश्विक स्तर पर है। उन्होंने कहा कि फल्गु नदी के पवित्र तट पर पिंडदान और तर्पण की परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है और यह बिहार की आध्यात्मिक चेतना व सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करती है।
देश-विदेश से गयाजी पहुँचते हैं लाखों श्रद्धालु
मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने रेखांकित किया कि पितृपक्ष के अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी लाखों श्रद्धालु अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और उनके मोक्ष की कामना लेकर गयाजी की पावन धरती पर पहुँचते हैं। उन्होंने कहा कि गयाजी की पवित्र भूमि पितृ ऋण चुकाने और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है, इसीलिए पितृपक्ष का यह पावन अवसर केवल गयाजी ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार के लिए अत्यंत गौरव का विषय है।
विश्व स्तर पर गयाजी को स्थापित करने का आह्वान
डॉ. सुमन ने इस बात पर विशेष बल दिया कि गयाजी की इस ऐतिहासिक, पौराणिक और आध्यात्मिक महत्ता को दुनिया के सामने और अधिक व्यापक रूप से स्थापित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गयाजी आने वाले श्रद्धालु केवल तीर्थयात्री नहीं होते, बल्कि वे वापस लौटकर पूरी दुनिया में बिहार की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और आतिथ्य सत्कार के ब्रांड एंबेसडर बनते हैं।
अधिकारियों को सुरक्षा और सुविधाओं के सख्त निर्देश
गयाजी आने वाले श्रद्धालुओं के सुगम अनुभव को ध्यान में रखते हुए मंत्री ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं, पेयजल और यातायात प्रबंधन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन का यह दायित्व है कि यहाँ आने वाले हर श्रद्धालु को एक सुलभ, सुरक्षित और सुखद वातावरण मिले।
विश्वस्तरीय आध्यात्मिक केंद्र बनाने का संकल्प
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि गयाजी को विश्वस्तरीय आध्यात्मिक और धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में लगातार ठोस प्रयास जारी रहने चाहिए। गयाजी की पहचान केवल एक सामान्य तीर्थस्थल के रूप में न होकर सनातन संस्कृति और पितृ परंपरा की विश्वव्यापी विरासत के रूप में हो—इसे हम सभी को मिलकर एक सामूहिक संकल्प के रूप में पूरा करना होगा।