जेन-जी के उग्र तेवर से सिहर उठी सियासत, खौफ से बदलने लगे दलों के समीकरण

Gen-Z politics: जेन-जी के उग्र तेवर और तीखे तेवरों ने पारंपरिक राजनीतिक दलों की चूलें हिला दी हैं।

बदलने लगे दलों के समीकरण- फोटो : social Media

Gen-Z politics: आभासी दुनिया की कोख से उपजी कॉकरोच जनता पार्टी  के सतह पर आते ही देश की मुख्यधारा की राजनीति में भूचाल आ गया है। जेन-जी (Gen-Z) के उग्र तेवर और तीखे तेवरों ने पारंपरिक राजनीतिक दलों की चूलें हिला दी हैं। युवाओं के इस बेकाबू आक्रोश का असर अब सत्ता के गलियारों साफ दिखने लगा है, जहां सियासतदान अपनी रणनीतियां रातों-रात बदलने को मजबूर हो गए हैं।

युवाओं के इस बढ़ते दबाव का ही नतीजा है कि भाजपा को अपने बेहद पसंदीदा और कद्दावर मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तक स्वीकार कराना पड़ गया। वहीं, झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार ने युवाओं के आक्रोश को भांपते हुए साल 2014 और उसके बाद की जेपीएससी और सीजीएल जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया।विपक्षी पार्टियां भी इस मौके को भुनाने में पीछे नहीं हैं।

 कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी लगातार युवाओं और छात्रों की आवाज सुन रहे हैं, तो वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने भी बिहार में रोजगार और शिक्षा जैसे ज्वलंत मुद्दों पर लोक भवन मार्च निकाला है। इसके अलावा, बिहार की राजनीति में पैठ बनाने की जुगत में लगे जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर भी लगातार इन मुद्दों पर सरकार को घेर रहे हैं। आम आदमी पार्टी पर तो CJP का संरक्षक होने तक के कयास लगने लगे हैं, जबकि बंगाल में ममता बनर्जी भी आंदोलनकारियों के प्रति सहानुभूति जता चुकी हैं।

युवाओं के इस बेजोड़ गुस्से और चुनावी समीकरणों को साधने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को खुद सोशल मीडिया पर रील बनाकर जेन-जी को यह भरोसा दिलाना पड़ा कि सरकार उनकी हर फिक्र करती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत को भी यह सफाई देनी पड़ी कि आंदोलन में शामिल युवा उनके अपने बच्चे हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सत्ता जाने से बौखलाई विपक्षी पार्टियां इस आंदोलन को केवल अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने का जरिया बना रही हैं, लेकिन सरकार के पास नीतिगत बदलावों और संवाद के जरिए इन मुद्दों को सुलझाने का पूरा अवसर है। बहरहाल, जेन-जी के इस नए तेवर ने साफ कर दिया है कि अब देश की सियासत बिना युवाओं की रजामंदी के नहीं चल सकती।