इस्कॉन मंदिर में मैंगो फेस्टिवल का भव्य आयोजन: 8 टन आमों और 20 प्रजातियों के फलों से सजा गर्भगृह, उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

पटना स्थित इस्कॉन (ISKCON) मंदिर में रविवार को भव्य 'मैंगो फेस्टिवल' का आयोजन किया गया, जहाँ भगवान श्री राधा बांके बिहारी जी के दरबार को करीब 8 टन आमों और इसकी 20 से अधिक खास किस्मों से अलौकिक रूप से सजाया गया...

इस्कॉन मंदिर में मैंगो फेस्टिवल का भव्य आयोजन- फोटो : वंदना शर्मा

Patna : राजधानी पटना स्थित भव्य इस्कॉन (ISKCON) मंदिर में रविवार को 'मैंगो फेस्टिवल' (आम उत्सव) का बेहद आकर्षक और अलौकिक आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर पूरे मंदिर परिसर और गर्भगृह को देश के कोने-कोने से मंगाए गए विभिन्न किस्मों के आमों से सजाया गया। इस मनमोहक और अनूठी प्राकृतिक सजावट ने मंदिर पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। भगवान श्री राधा बांके बिहारी जी के दर्शन के साथ आमों की यह अद्भुत कलाकृति भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रही।


8 टन आम और 20 से अधिक प्रजातियों से सजा दरबार

इस मैंगो फेस्टिवल को भव्य रूप देने के लिए मंदिर प्रशासन द्वारा करीब 8 टन (8000 किलोग्राम) आमों का उपयोग किया गया। मंदिर को सजाने के लिए आमों की 20 से अधिक प्रसिद्ध और दुर्लभ किस्मों को शामिल किया गया था, जिसमें मालदा, जर्दालू, लंगड़ा, दशहरी और अल्फांसो जैसे फल शामिल रहे। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, इस भव्य और प्राकृतिक सजावट के माध्यम से न केवल भगवान के प्रति आस्था प्रकट की गई, बल्कि आम जनमानस को प्रकृति के प्रति प्रेम, पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बचाने का एक सार्थक संदेश भी दिया गया।


'आम' केवल फल नहीं बल्कि ईश्वर के रस का प्रतीक

कार्यक्रम के दौरान इस्कॉन टीएमसी (Temple Management Committee) के को-चेयरमैन रमन मनोहर दास ने उत्सव के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आम को यूँ ही फलों का राजा नहीं कहा जाता, यह असल में मधुरता और दिव्य रस का प्रतीक है। ठीक इसी तरह, परमपिता परमेश्वर अपने अनन्य प्रेम, वात्सल्य और कृपा रस के माध्यम से इस संपूर्ण चराचर संसार को आनंदित और रससिक्त करते हैं। भगवान को उनकी ही दी हुई प्रकृति के सर्वोत्तम उपहार को अर्पित करना भक्ति का ही एक रूप है।


श्रीकृष्ण हैं सभी रसों के अधिष्ठाता

वहीं, टीएमसी सदस्य राधापति चरण दास ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण स्वयं सभी रसों के मूल और अधिष्ठाता हैं। वे अपने भक्तों से केवल प्रेम, सच्ची भक्ति और पूर्ण समर्पण की चाह रखते हैं, जो मानव जीवन को सार्थक बनाने का एकमात्र मार्ग है। उन्होंने यह भी साझा किया कि देश-विदेश में इस्कॉन के जितने भी प्रमुख केंद्र हैं, उन सभी में इस आम उत्सव (मैंगो फेस्टिवल) को बेहद उत्साह, उमंग और गहरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, ताकि लोग सनातन संस्कृति के इस सुंदर स्वरूप से जुड़ सकें।


श्रद्धालुओं के बीच हुआ महाप्रसाद का वितरण

दिनभर चले इस भव्य उत्सव के समापन पर भगवान को अर्पित किए गए इन रसीले आमों को 'महाप्रसाद' के रूप में परिवर्तित किया गया। शाम की आरती के बाद मंदिर परिसर में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं और भक्तों के बीच इस आम महाप्रसाद का वितरण किया गया, जिसे पाकर भक्त निहाल हो उठे। इस दिव्य और भव्य आयोजन के दौरान टीएमसी सदस्य वेणु विनोद दास सहित इस्कॉन से जुड़े कई वरिष्ठ पदाधिकारी, सेवादार और भारी संख्या में स्थानीय व दूर-दराज से आए श्रद्धालु उपस्थित रहे।

वंदना की रिपोर्ट