मोकामा में भव्य रावण दहन: जय श्रीराम के जयकारों के बीच असत्य पर सत्य की विजय का उत्सव, पीके शाही और डीआईजी अच्युतानंद रहे मुख्य अतिथि

विजय दशमी के मौके पर मोकामा के एसकेएम स्कूल परिसर में 55 फीट ऊंचे रावण और 50-50 फीट के कुंभकर्ण-मेघनाद के पुतले का दहन किया गया। रावण वध की यह परंपरा 1980 के दशक से चली आ रही है.....

मोकामा में भव्य रावण दहन- फोटो : प्रिय दर्शन

Patna : जिले के मोकामा स्थित एसकेएम स्कूल परिसर में विजयादशमी के पावन अवसर पर रावण दहन समारोह का आयोजन बेहद धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। हजारों की संख्या में जुटे स्थानीय लोगों की उपस्थिति और 'जय श्रीराम' के गगनभेदी जयकारों के बीच 55 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। इसके साथ ही 50-50 फीट ऊंचे कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले भी आकर्षण का केंद्र रहे। समारोह के दौरान प्रस्तुत राम-रावण युद्ध की जीवंत झांकी ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया और समाज को बुराई पर अच्छाई की जीत का अमर संदेश दिया।


अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति और राम दरबार की झांकी

इस भव्य समारोह में बिहार के पूर्व मंत्री एवं प्रसिद्ध अधिवक्ता पीके शाही मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि सीआरपीएफ मोकामा घाट के डीआईजी अच्युतानंद विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन अतिथियों द्वारा किया गया। इसके पश्चात ऐतिहासिक तपस्वी जी ठाकुरबाड़ी से भव्य राम दरबार की झांकी निकाली गई, जो नगर भ्रमण करते हुए मुख्य स्थल पर पहुँची। शाम को राम-रावण युद्ध का रोमांचक मंचन हुआ, जिसके बाद रावण दहन की मुख्य रस्म पूरी की गई।


वक्ताओं ने दिए भगवान राम के आदर्शों पर चलने के संदेश

मुख्य अतिथि पीके शाही ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान श्रीराम हर युग में न्याय, मर्यादा और धर्म के प्रतीक रहे हैं, जबकि रावण अहंकार और अन्याय का पर्याय था। विजयादशमी का यह पर्व हमें भगवान राम के आदर्शों को जीवन में उतारने और सत्पथ पर चलने की प्रेरणा देता है।


विशिष्ट अतिथि सीआरपीएफ डीआईजी अच्युतानंद ने कहा कि रावण दहन का यह उत्सव मनुष्य को मन के भीतर छिपे अहंकार, अत्याचार और बुराइयों का त्याग करने का संदेश देता है। भगवान राम के आदर्शों को अपनाकर ही एक अनुशासित और मर्यादित जीवन की कल्पना की जा सकती है।


1980 के दशक से चली आ रही है मोकामा की यह सांस्कृतिक परंपरा

रावण वध समारोह समिति के सचिव सुदर्शन ने जानकारी दी कि मोकामा में रावण दहन की यह गौरवशाली परंपरा 1980 के दशक से चली आ रही है। राजधानी पटना के बाद मोकामा ही ऐसा शहर है, जहाँ हर साल इस परंपरा को इतने बड़े पैमाने पर निभाया जाता है। अब यह आयोजन मोकामा की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है।


इस सफल आयोजन में बाढ़ के एसडीएम कृष्णा जोशी और डीएसपी राम कृष्ण सहित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का पूरा सहयोग रहा। इस दौरान मंच पर देवेंद्र सिंह, राम किशोर, प्रो. अरविंद कुमार, डॉ. सुधांशु शेखर और प्रेम प्रकाश मनोज सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जबकि समिति के कोषाध्यक्ष संजय कुमार ने आयोजन का आय-व्यय विवरण प्रस्तुत किया। विशाल पुतलों के दहन और आतिशबाजी के साथ पूरा मोकामा परिसर उत्सवमय हो उठा।


प्रिय दर्शन की रिपोर्ट