विजयादशमी पर हिन्दू युवा शक्ति संघ ने किया भव्य शस्त्र पूजन: सूर्यकुण्ड से मां मंगला मंदिर तक दिखा उत्साह
हिन्दू सनातन परंपरा में विजयादशमी का पर्व अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य की विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस दिन शस्त्र पूजन की परंपरा के अनुसार हिन्दू युवा शक्ति संघ ने किया शस्त्र पूजन कर धर्म, साहस, शक्ति और राष्ट्ररक्षा का दिया संदेश..
Gayaji : विजयादशमी के पावन अवसर पर हिन्दू युवा शक्ति संघ की ओर से प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी शस्त्र पूजन कार्यक्रम का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत ऐतिहासिक सूर्यकुण्ड से हुई, जहाँ से संघ के सदस्य जयकारों के साथ माँ मंगला मंदिर पहुँचे। मंदिर परिसर में विधि-विधान एवं धार्मिक परंपराओं के अनुसार मंत्रोच्चार के बीच शस्त्रों का पूजन किया गया।
सैकड़ों कार्यकर्ताओं व श्रद्धालुओं ने ली राष्ट्ररक्षा की शपथ
इस भव्य आयोजन में संघ के अध्यक्ष, विनय गुप्ता, गोल्डी गायब, छोटू बारीक, रामू गुप्त, मिथुन गुप्त, अभिषेक कत्रियार, विवेक भारद्वाज, ऋषि पाठक, पवन मिश्रा, शशांक मिश्रा, छोटू गुप्त, नंदू बारीक, मैक्स अवस्थी, करण गुप्ता, शिवम सिन्हा, रोहम सिंह, शुभम कुमार, रौशन कुमार, गोकुल दुबे, कुमार सानू, सागर दयाल, संदीप कत्रियार, राहुल सिंह, विशाल कुमार, रोहित एकघरा, हरिशंकर जी और निखिल निशांत जी सहित सैकड़ों की संख्या में संघ के सदस्य एवं स्थानीय श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने विजयादशमी के पावन पर्व पर पूजा-अर्चना कर अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं के प्रति गहरी आस्था व्यक्त की।
शस्त्र पूजन का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्त्व
हिन्दू सनातन परंपरा में विजयादशमी का पर्व अधर्म पर धर्म, अन्याय पर न्याय और असत्य पर सत्य की विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस पावन दिन पर शस्त्र पूजन की परंपरा शक्ति, साहस, आत्मरक्षा और धर्म की रक्षा के दृढ़ संकल्प से जुड़ी हुई है। यह पूजन हमें यह सीख देता है कि शस्त्र केवल बल प्रदर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्ररक्षा और समाज की सुरक्षा के लिए उनका संयमित और न्यायपूर्ण उपयोग आवश्यक है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि को माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध कर अधर्म का अंत किया था और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का संहार कर धर्म की पुनर्स्थापना की थी। हिन्दू युवा शक्ति संघ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य धार्मिक परंपराओं का संरक्षण, सांस्कृतिक चेतना का प्रसार तथा समाज में आपसी एकता और भ्रातृत्व की भावना को सुदृढ़ करना रहा। कार्यक्रम के समापन पर सभी ने एक-दूसरे को विजयादशमी की बधाई दी और राष्ट्रहित व धर्मरक्षा के प्रति सदैव समर्पित रहने का संकल्प लिया।
मनोज की रिपोर्ट