Bihar News : पटना में ग्रीन एनर्जी कॉन्क्लेव-2026 का हुआ आयोजन, ऊर्जा मंत्री बोले- अक्षय ऊर्जा और सोलर परियोजनाओं से बदलेगा बिहार का ऊर्जा परिदृश्य
Bihar News : बिहार में अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने, नवीकरणीय ऊर्जा की संभावनाओं का लाभ उठाने तथा उद्योगों को सौर ऊर्जा से जोड़ने के उद्देश्य से राजधानी पटना में 'ग्रीन एनर्जी कॉन्क्लेव-2026' का भव्य आयोजन किया गया。
PATNA : बिहार में अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने, नवीकरणीय ऊर्जा की संभावनाओं का लाभ उठाने तथा उद्योगों को सौर ऊर्जा से जोड़ने के उद्देश्य से पटना में ग्रीन एनर्जी कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन किया गया। कॉन्क्लेव में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार, औद्योगिक एवं रूफटॉप सोलर, ऊर्जा भंडारण, नीतिगत एवं संस्थागत व्यवस्था तथा सरकार, उद्योग जगत और विकास साझेदारों के बीच सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में बिहार के माननीय ऊर्जा मंत्री श्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बिहार में बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने, ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने और स्थिर आर्थिक विकास को गति देने में अक्षय ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। राज्य में सौर ऊर्जा, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS), पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट (PSP), ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं के विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि बढ़ती आबादी, शहरीकरण, औद्योगिक गतिविधियों और आर्थिक विकास के कारण बिहार में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। राज्य ने अब तक 9,475 मेगावाट की रिकॉर्ड पीक बिजली मांग को पूरा किया है। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बिजली उत्पादन, पारेषण, वितरण और ऊर्जा भंडारण की क्षमता को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऊर्जा क्षेत्र में नई परियोजनाओं और निवेश को हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी।
उन्होंने बताया कि राज्य में लगभग 2.5 लाख पात्र गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले (BPL) परिवारों को रूफटॉप सोलर योजना से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। पीएम सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने के साथ-साथ बैटरी स्टोरेज और अन्य आधुनिक तकनीकों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) के तहत राज्य के 2,554 कृषि फीडरों के सोलराइजेशन को मंजूरी दी गई है, जिसके अंतर्गत 2,585 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि छठ पर्व में सूर्य उपासना की परंपरा बिहार की सांस्कृतिक पहचान है। इसी भावना के अनुरूप राज्य दिन में सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग करने और शाम के समय बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के लिए बैटरी स्टोरेज क्षमता बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
कॉन्क्लेव के प्लेनरी सत्र-I “Accelerating Renewable Energy Transition and Industrial Solarisation in Bihar” में ऊर्जा विभाग, बिहार सरकार के सचिव श्री अजय यादव (भा.प्र.से.), तथा उद्योग विभाग, बिहार सरकार के सचिव श्री कुंदन कुमार (भा.प्र.से.), ने भाग लिया। सत्र में बिहार में नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने की संभावनाओं, नीतिगत एवं संस्थागत व्यवस्था, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) तथा औद्योगिक इकाइयों में सौर ऊर्जा के उपयोग और औद्योगिक क्लस्टर आधारित सौर परियोजनाओं पर चर्चा की गई। साथ ही, निवेश को प्रोत्साहित करने और परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकार, उद्योग जगत एवं विकास साझेदारों के बीच समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया गया। ऊर्जा सचिव-सह-अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड (BSPHCL) अजय यादव (भा.प्र.से.) ने बताया कि बिहार में बिजली की पीक मांग वित्तीय वर्ष 2014 में 2800 मेगावाट थी, जो बढ़कर 2026 में 9,475 मेगावाट हो गई है। वर्ष 2030 तक इसके लगभग 12000 मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन, संचरण, वितरण और ऊर्जा भंडारण की क्षमता बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि बिहार में सौर ऊर्जा, सोलर पार्क, बायोमास, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज, पंप्ड स्टोरेज और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के साथ सोलर उपकरण निर्माण तथा ऊर्जा अवसंरचना के क्षेत्र में भी निवेश की व्यापक संभावनाएं है। राज्य में परमाणु ऊर्जा सहित विभिन्न ऊर्जा स्रोतों के विकास की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। ऊर्जा क्षेत्र में जारी सुधारों और नई परियोजनाओं से औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना को मजबूती मिलेगी। बिहार सरकार की रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी-2025 एवं पंप्ड स्टोरेज नीति के तहत राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण क्षमता के विकास के लिए कार्य किया जा रहा है। इन नीतियों के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2029-30 तक लगभग 24 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता तथा 6.1 गीगावाट-घंटा ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस दिशा में कृषि फीडरों के सोलराइजेशन, रूफटॉप सोलर, सोलर-प्लस-स्टोरेज तथा पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, बिहार सरकार की ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2026 के तहत राज्य में हरित ऊर्जा के विकास एवं निवेश को प्रोत्साहित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित बिहार राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में ऊर्जा विभाग से संबंधित महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। इसके तहत बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के अंतर्गत दरभंगा एवं खगौल स्थित ग्रिड उपकेंद्रों में 200 MVA क्षमता के दो पावर ट्रांसफॉर्मर स्थापित करने हेतु ₹33.44 करोड़ की योजना को मंजूरी दी गई। साथ ही, राज्य की बिजली वितरण व्यवस्था को सुदृढ़ एवं सुचारु बनाने के उद्देश्य से तीन वर्षों की कार्ययोजना के तहत ₹11,096.55 करोड़ की योजना को स्वीकृति दी गई। इस योजना के अंतर्गत एलटी (लो टेंशन) विद्युत प्रणाली एवं केबलों का विस्तार, अधिभारित ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता में वृद्धि तथा वितरण नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण से संबंधित कार्य किए जाएंगे। इन निर्णयों से राज्य की विद्युत अवसंरचना को मजबूती मिलेगी तथा उपभोक्ताओं को बेहतर, विश्वसनीय एवं सुचारु विद्युत सेवा उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। उन्होंने बताया कि बिहार के लखीसराय जिले के कजरा में स्थित सौर ऊर्जा संयंत्र देश की सबसे बड़ी बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) वाली परियोजनाओं में से एक है। इसके प्रथम चरण में 185 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता और 282 मेगावाट-आवर बैटरी भंडारण प्रणाली का संचालन हो रहा है, जबकि द्वितीय चरण में 116 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता और 241 मेगावाट-आवर बैटरी भंडारण प्रणाली का कार्य प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त, तृतीय चरण में 500 मेगावाट-आवर बैटरी भंडारण प्रणाली विकसित करने की दिशा में पहल की जा रही है।
यादव ने कहा कि विद्युत ग्रिड, उपकेंद्रों और संचरण लाइनों के विस्तार के साथ राज्य की विद्युत अवसंरचना को लगातार मजबूत किया जा रहा है। अगले एक वर्ष में वितरण कंपनियों और पारेषण व्यवस्था की क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। औद्योगिक क्षेत्रों को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने के लिए समर्पित फीडर तथा बेहतर निगरानी एवं उपभोक्ता सेवा व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बिहार सरकार ने निजी निवेश, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज-2025 तैयार किया है। ऊर्जा क्षेत्र में उत्पादन, पारेषण एवं वितरण से जुड़ी परियोजनाओं और विद्युत अवसंरचना के विस्तार से राज्य में औद्योगिक विकास के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।
ग्रीन एनर्जी कॉन्क्लेव-2026 का उद्देश्य बिहार में स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार के लिए सहयोग के नए अवसर तलाशना, औद्योगिक सौर ऊर्जा को प्रोत्साहित करना तथा राज्य को ऊर्जा-सक्षम और निवेश-अनुकूल विकास की दिशा में आगे बढ़ाना है। कॉन्क्लेव में इस बात पर जोर दिया गया कि बढ़ती बिजली मांग, औद्योगिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा की जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार, उद्योग जगत, निवेशकों और विकास साझेदारों के बीच प्रभावी सहयोग आवश्यक है।