Bihar Politics : बिहार में वित्तीय संकट के दावों पर HAM का पलटवार, श्याम सुंदर शरण बोले- राजनीतिक आरोपों के बजाय आंकड़े पेश करे विपक्ष

Bihar Politics : हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (से.) के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता श्याम सुन्दर शरण ने तेजस्वी यादव के बिहार में अगले छह महीनों में वित्तीय संकट आने संबंधी बयान पर पलटवार किया है.....पढ़िए आगे

तेजस्वी पर HAM का पलटवार - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA :  हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (से.) के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता श्याम सुन्दर शरण ने बिहार में अगले छह महीनों के भीतर वित्तीय संकट गहराने संबंधी नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बयान पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति पर किसी भी तरह के निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले बजट के वास्तविक और प्रमाणिक आंकड़ों का अध्ययन करना बेहद आवश्यक है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में राज्य सरकार ने ₹3.47 लाख करोड़ से अधिक के व्यय का प्रावधान किया है, जिसके जरिए विकास एवं जनकल्याण से जुड़ी सभी प्रमुख योजनाओं का सुचारू संचालन किया जा रहा है।

हम प्रवक्ता शरण ने स्पष्ट किया कि किसी राज्य पर सार्वजनिक कर्ज होना और वित्तीय संकट की स्थिति उत्पन्न होना दो बिल्कुल अलग बातें हैं। उन्होंने कहा कि बजट दस्तावेज में राजकोषीय घाटे और सार्वजनिक ऋण की वास्तविक स्थिति पूरी तरह पारदर्शी और स्पष्ट रूप से दर्ज है। राज्य सरकार पूर्ण वित्तीय अनुशासन का पालन करते हुए सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और ग्रामीण विकास जैसे बुनियादी ढांचों में बड़ा निवेश कर रही है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यदि तेजस्वी यादव राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहे हैं, तो उन्हें अपने दावों के समर्थन में ठोस और प्रामाणिक आंकड़े भी सार्वजनिक मंच पर रखने चाहिए। केवल राजनीतिक लाभ के लिए अनर्गल बयानबाजी करने के बजाय तथ्य सामने लाने से ही जनता के समक्ष राज्य की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी।

श्याम सुंदर शरण ने आगे कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को सरकार की आर्थिक व वित्तीय नीतियों पर सवाल उठाने का पूरा संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इतने संवेदनशील विषय पर राजनीतिक छीटाकंशी के बजाय तथ्यों पर आधारित बहस होना अधिक उपयोगी और सार्थक होगा। हवा-हवाई आरोपों से राज्य का माहौल खराब करने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।

अंत में उन्होंने जोर देकर कहा कि बिहार सरकार विकास की प्राथमिकताओं और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के बीच बेहतरीन संतुलन बनाकर आगे बढ़ रही है। राज्य की अर्थव्यवस्था और वित्तीय सेहत को लेकर स्वस्थ, तथ्यपरक और जिम्मेदार सार्वजनिक विमर्श होना ही अंततः राज्य हित में है, इसलिए विपक्ष को गैर-जिम्मेदाराना बयानों से बचना चाहिए।