Bihar News : केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी के 'सौतेले बेटे' वाले बयान पर 'हम' का पलटवार, कहा- बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश करना दुर्भाग्यपूर्ण

Bihar News : हम ने कहा की मीडिया के कुछ साथियों द्वारा हाल के दिनों में जीतन राम मांझी जी के बयान को जिस तरह से तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया है, वह न सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण भी है......पढ़िए आगे

बयान का खण्डन - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी द्वारा अपने पुत्र और बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन को 'सौतेला बेटा' कहे जाने की खबरों का हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) ने कड़ा खंडन किया है। पार्टी ने इन खबरों को भ्रामक बताते हुए स्पष्ट किया है कि जीतन राम मांझी के बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है, जो बेहद गैर-जिम्मेदाराना है।

बयान का गलत अर्थ निकाला गया

पार्टी के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता श्याम सुंदर शरण ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि जीतन राम मांझी ने अपने वक्तव्य में कहीं भी संतोष कुमार सुमन के लिए "सौतेला बेटा" शब्द का प्रयोग नहीं किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोधियों या कुछ शरारती तत्वों द्वारा एक संवेदनशील पारिवारिक प्रसंग को गलत रंग देकर जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है।

'सौतेली माँ' का था संदर्भ

प्रवक्ता ने स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि मांझी ने "सौतेली माँ" का संदर्भ दिया था। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान यह जानकारी साझा की थी कि जब संतोष सुमन मात्र 9 महीने के थे, तभी उनकी माता का देहांत हो गया था। इसके बावजूद जीतन राम मांझी ने पिता और माता दोनों का कर्तव्य निभाते हुए उनका बेहतर लालन-पालन किया, उन्हें उच्च शिक्षा दिलाई और आज वे उन्हें अपना योग्य उत्तराधिकारी मानते हैं।

प्रेरणादायक संदेश को बनाया विवाद

श्याम सुंदर शरण के अनुसार, मांझी का पूरा संदेश समाज के लिए एक प्रेरणा था। वे यह बताना चाह रहे थे कि विपरीत और कठिन परिस्थितियों के बावजूद यदि बच्चों को सही परवरिश और शिक्षा दी जाए, तो वे ऊँचे मुकाम तक पहुँच सकते हैं। लेकिन दुर्भाग्यवश इस प्रेरणादायक प्रसंग को विवाद का रूप दे दिया गया।

भ्रम फैलाने वालों को चेतावनी

पार्टी ने साफ तौर पर कहा है कि इस तरह की बयानबाजी न सिर्फ व्यक्तिगत गरिमा को ठेस पहुँचाती है बल्कि सामाजिक संवाद के स्तर को भी गिराती है। 'हम' ने अपील की है कि सार्वजनिक जीवन में किसी के निजी संघर्षों और पारिवारिक प्रसंगों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने से बचना चाहिए।