पटना हाईकोर्ट की फटकार के बाद बिहार सरकार का बड़ा फैसला; पूर्व जिला समादेष्टा हरेन्द्र सिंह निलंबन मुक्त, 6 साल बाद मिली राहत
बिहार सरकार के गृह विभाग ने पटना उच्च न्यायालय के कड़े रुख के बाद एक बड़ा फैसला लेते हुए मुजफ्फरपुर के तत्कालीन जिला समादेष्टा हरेन्द्र कुमार सिंह को बड़ी राहत दी है ।
Patna : बिहार सरकार के गृह विभाग ने मुजफ्फरपुर के तत्कालीन जिला समादेष्टा हरेन्द्र कुमार सिंह को बड़ी राहत देते हुए उन्हें 03 जुलाई 2019 के प्रभाव से निलंबन मुक्त कर दिया है । यह निर्णय माननीय पटना उच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में दी गई सजा और विभागीय कार्यवाही को 'अवैध' करार देते हुए रद्द करने के बाद लिया गया है । हालांकि, विभाग ने न्यायालय के निर्देशों के आलोक में श्री सिंह के विरुद्ध नए सिरे से जांच शुरू करने का निर्णय लिया है ।
2017 में अनुशासनहीनता के आरोप और निलंबन
यह मामला मई 2017 का है, जब मुजफ्फरपुर के तत्कालीन जिला समादेष्टा हरेन्द्र कुमार सिंह पर बिना अनुमति सरकारी वाहन के साथ मुख्यालय छोड़ने और नशे की हालत में मारपीट करने के गंभीर आरोप लगे थे । इन आरोपों के आधार पर उन्हें 19 मई 2017 को निलंबित कर दिया गया था और उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही शुरू की गई थी ।
पांच वेतन वृद्धियों पर रोक और हाईकोर्ट की शरण
विभागीय जांच के उपरांत जुलाई 2019 में उन्हें निलंबन से मुक्त तो किया गया, लेकिन सजा के तौर पर उनकी पांच वेतन वृद्धियों (Increment) पर संचयी प्रभाव से रोक लगा दी गई थी । इस दंडादेश के विरुद्ध श्री सिंह ने पटना उच्च न्यायालय में याचिका दायर की । उच्च न्यायालय ने मई 2025 में अपना फैसला सुनाते हुए पूरी कार्यवाही को 'पक्षपातपूर्ण' और 'अवैध' बताते हुए सजा के आदेश को निरस्त कर दिया
विभाग ने दंडादेश को किया निरस्त
उच्च न्यायालय के कड़े रुख और विधि विभाग से प्राप्त विधिक परामर्श के बाद, गृह विभाग ने 22 अक्टूबर 2025 को पूर्व में जारी सजा के संकल्पों को आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया है । विभाग ने अब स्पष्ट किया है कि श्री सिंह 03 जुलाई 2019 से ही निलंबन मुक्त माने जाएंगे । वर्तमान में वे मुंगेर में वरीय जिला समादेष्टा के पद पर तैनात हैं ।
नए सिरे से शुरू होगी विभागीय कार्यवाही
भले ही पुराने दंडादेश रद्द कर दिए गए हों, लेकिन सक्षम प्राधिकार ने श्री सिंह के विरुद्ध नए सिरे से विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया है । इसके लिए मुख्य जांच आयुक्त को संचालन पदाधिकारी और महासमादेष्टा, गृह रक्षा वाहिनी को उपस्थापन पदाधिकारी नियुक्त किया गया है । यह जांच सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों के तहत पूरी की जाएगी ।
वेतन भुगतान पर जांच के बाद होगा फैसला
निलंबन अवधि के दौरान के वेतन और अन्य भत्तों के भुगतान को लेकर विभाग ने फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं की है । संकल्प के अनुसार, श्री सिंह को निलंबन अवधि के वेतनादि का भुगतान नई विभागीय कार्यवाही के अंतिम परिणाम (फलाफल) के आधार पर तय किया जाएगा । यह आदेश राज्यपाल के आदेश से संयुक्त सचिव उपेन्द्र प्रसाद द्वारा जारी किया गया है ।