Harivansh Narayan Singh फिर जाएंगे राज्यसभा,JDU ने नहीं भेजा, राष्ट्रपति ने राज्यसभा के लिए किया नामित ,क्यों अहम है हरिवंश की वापसी, पढ़िए

Harivansh Narayan Singh एक बार फिर राज्यसभा जाएंगे।राष्ट्रपति ने हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा के लिए नामित किया।

एक बार फिर संसद में लौटेंगे हरिवंश- फोटो : reporter

Harivansh Narayan Singh: भारतीय राजनीति के गलियारों में एक बार फिर बड़ा सियासी धमाका हुआ है। राष्ट्रपति ने वरिष्ठ पत्रकार और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह को एक बार फिर राज्यसभा के लिए नामित कर दिया है। जैसे ही यह खबर आई, दिल्ली से लेकर पटना तक सियासी हलचल तेज़ हो गई और गठबंधन की राजनीति के नए मायने तलाशे जाने लगे।

हरिवंश नारायण सिंह का मौजूदा कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो चुका था और इस बार जदयू ने उन्हें औपचारिक तौर पर टिकट नहीं दिया था। ऐसे में माना जा रहा था कि उनका संसदीय सफर यहीं थम सकता है, लेकिन राष्ट्रपति के नामांकन ने पूरी कहानी ही पलट दी।

संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वे साहित्य, विज्ञान, कला और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष योगदान देने वाले 12 व्यक्तियों को राज्यसभा के लिए नामित कर सकते हैं। इसी संवैधानिक प्रावधान के तहत हरिवंश को एक बार फिर उच्च सदन में जगह मिली है, जिससे उनके राजनीतिक और वैचारिक कद को और मजबूती मिली है।

हरिवंश नारायण सिंह पहली बार 2014 में जदयू के समर्थन से राज्यसभा पहुंचे थे और तब से लगातार संसदीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। 2018 में वे राज्यसभा के उपसभापति चुने गए और 2020 में दोबारा इस अहम संवैधानिक पद पर आसीन हुए। उनकी भूमिका संसद की कार्यवाही को संतुलित और व्यवस्थित रखने में बेहद महत्वपूर्ण रही है।

दिलचस्प बात यह है कि नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाने वाले हरिवंश, हाल के वर्षों में राजनीतिक समीकरणों के बदलने के बावजूद अपने पद पर बने रहे। जब जदयू ने एनडीए से दूरी बनाई थी, तब भी उन्होंने उपसभापति पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था, यह कहते हुए कि उनका पद संवैधानिक है, राजनीतिक नहीं।

यही नहीं, नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में उनकी मौजूदगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सार्वजनिक सराहना ने उनके राजनीतिक रुख को लेकर नई बहस भी छेड़ दी थी। विपक्ष के बहिष्कार के बीच उनकी उपस्थिति ने उन्हें केंद्र की राजनीति के और करीब ला दिया।अब राष्ट्रपति नामांकन के जरिए उनका फिर से राज्यसभा पहुंचना न सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि माना जा रहा है, बल्कि यह भी संकेत दे रहा है कि दिल्ली की सत्ता राजनीति में उनके अनुभव और भूमिका को अभी भी बेहद अहम माना जा रहा है।
दिल्ली से धीरज कुमार सिंह की विशेष रिपोर्ट