Bihar Rajya Sabha Chunav 2026:विधायक एक वोट में दो प्रत्याशी चुनते हैं, प्रथम-दूसरी वरीयता का खेल क्या है, जो बिहार की 5वीं सीट का फैसला करेगा? पढ़िए
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया आम चुनावों से बिल्कुल अलग और कुछ हद तक पेचीदा होती है। राज्यसभा चुनाव में एकल संक्रमणीय आनुपातिक मतदान प्रणाली लागू होती है।...
Bihar Rajya Sabha Chunav 2026: बिहार की सियासी फिज़ा इन दिनों बेहद गरम है। कल यानी 16 मार्च को राज्यसभा की पाँच सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब महज़ एक संसदीय प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि सत्ता और विपक्ष के बीच प्रतिष्ठा की जंग बन चुका है। सियासी गलियारों में हलचल, जोड़-तोड़ और सियासी दाँव-पेच का दौर तेज़ हो गया है।
मौजूदा हालात में चार सीटों पर एनडीए की जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन पाँचवीं सीट ने राजनीतिक समीकरणों को उलझाकर रख दिया है। इस सीट के लिए महागठबंधन और एनडीए के बीच जबरदस्त टक्कर देखने को मिल रही है। यही वजह है कि अब छोटे दलों के विधायक अचानक सियासी मंच के किंगमेकर बन गए हैं।
खासतौर पर ओवैसी की पार्टी AIMIM के पाँच विधायक और बसपा का एकमात्र विधायक इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। इन छह वोटों की अहमियत इतनी बढ़ गई है कि दोनों खेमों की निगाहें इन्हीं पर टिकी हुई हैं। हर दल अपनी जीत का दावा कर रहा है, मगर असली तस्वीर वोटों की गिनती के बाद ही साफ होगी।
दरअसल, राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया आम चुनावों से बिल्कुल अलग और कुछ हद तक पेचीदा होती है। विधानसभा या लोकसभा चुनाव में जिस उम्मीदवार को ज्यादा वोट मिलते हैं, वही जीतता है। लेकिन राज्यसभा चुनाव में एकल संक्रमणीय आनुपातिक मतदान प्रणाली लागू होती है। इसमें विधायक सिर्फ एक उम्मीदवार को नहीं, बल्कि कई उम्मीदवारों को अपनी पसंद के अनुसार क्रमवार वोट दे सकते हैं।
मतदान के दौरान विधायक बैलेट पेपर पर अपने पसंदीदा उम्मीदवार के सामने रोमन में 1 लिखते हैं, जो उनकी पहली पसंद होती है। दूसरी पसंद के लिए 2, और इसी तरह आगे की वरीयता अंकित की जाती है। मतगणना के समय सबसे पहले पहली वरीयता के वोट गिने जाते हैं।
किसी उम्मीदवार को जीतने के लिए कुल वैध मतों के 50 प्रतिशत से एक अधिक वोट हासिल करना जरूरी होता है। अगर कोई प्रत्याशी इस आंकड़े तक नहीं पहुँचता, तो सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवार को बाहर कर दिया जाता है और उसके बैलेट पेपर पर दर्ज दूसरी वरीयता के वोट बाकी उम्मीदवारों में ट्रांसफर कर दिए जाते हैं।
यही वजह है कि बिहार की यह सियासी जंग बेहद दिलचस्प हो गई है। पहली पसंद से ज्यादा अब दूसरी और तीसरी पसंद के वोट भी सत्ता का रास्ता तय कर सकते हैं। ऐसे में सवाल यही है क्या एनडीए पाँचवीं सीट पर भी बाज़ी मार लेगा या महागठबंधन आख़िरी दांव से सियासी पलड़ा पलट देगा?