'धान के कटोरे' में लौटी रौनक: मानसूनी बारिश के बाद युद्ध स्तर पर धान की रोपाई में जुटे किसान
पटना जिले के बिक्रम, पालीगंज और दुलहिन बाजार में मानसूनी बारिश के बाद किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। 15 जून से गिराए गए धान के बिचड़े अब रोपाई के लिए तैयार हैं। जानिए कैसे किसान युद्ध स्तर पर खेती के काम में जुट गए हैं।"
लंबे समय से उमस भरी गर्मी झेल रहे पटना जिले के किसानों के लिए मानसूनी बारिश बड़ी राहत लेकर आई है। शुक्रवार देर रात से शुरू होकर शनिवार को दिनभर हुई इस झमाझम वर्षा ने न केवल आम लोगों को गर्मी से निजात दिलाई, बल्कि अन्नदाताओं के चेहरे पर भी मुस्कान बिखेर दी है। इस समय हुई बारिश को किसान खेती के लिए एक बड़ा वरदान मान रहे हैं, जिससे कृषि कार्यों को नई रफ्तार मिली है।
धान का कटोरा गुलजार: बिक्रम और पालीगंज में कृषि कार्य तेज
पटना जिले का 'धान का कटोरा' कहे जाने वाले पालीगंज, दुलहिन बाजार और बिक्रम के इलाकों में बारिश के बाद खेती-किसानी की रौनक लौट आई है। खेतों में पर्याप्त पानी जमा होने से धान की रोपाई के लिए अनुकूल माहौल बन गया है। किसान अब बिना समय गंवाए युद्ध स्तर पर धान की रोपनी के लिए खेतों की जुताई करने, कादो (कीचड़ बनाने) और खेतों की मेड़बंदी (आरी बांधने) के काम में पूरी ताकत से जुट गए हैं।
बिचड़ा तैयार: रोपाई के काम में जुटे कई सक्रिय किसान
इलाके के अधिकांश किसान 15 जून से ही अपने खेतों में धान का बिचड़ा (पौध) डाल चुके थे, जिसमें से 50 प्रतिशत से अधिक बिचड़ा अब पूरी तरह रोपाई के लिए तैयार हो चुका है। ऐसे में इस मानसूनी बारिश ने सही समय पर संजीवनी का काम किया है। कई जागरूक और सक्रिय किसानों ने खेतों में पानी लगते ही तुरंत धान की रोपाई का काम शुरू भी कर दिया है, जबकि कुछ किसान अभी बिचड़ा पूरी तरह तैयार होने का इंतजार कर रहे हैं।
फसल के लिए वरदान: अच्छी पैदावार के लिए आगे भी बारिश की आस
धान की खेती के लिए शुरुआती दौर में भरपूर पानी और मिट्टी में अच्छी नमी का होना सबसे जरूरी माना जाता है। किसानों का स्पष्ट कहना है कि यह बारिश उनके लिए किसी लॉटरी से कम नहीं है क्योंकि इससे सिंचाई के महंगे साधनों पर उनकी निर्भरता कम होगी। हालांकि, किसानों का यह भी मानना है कि धान की बंपर पैदावार और बेहतर उपज प्राप्त करने के लिए आने वाले दिनों में भी इसी तरह नियमित अंतराल पर बारिश का होना बेहद आवश्यक है।
रिपोर्ट - ऋषिकेश