IGIMS Kidney Transplant:आईजीआईएमएस की बड़ी कामयाबी, 10 साल में 138 किडनी ट्रांसप्लांट, मंगल पांडेय ने दिया स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसे का पैगाम

IGIMS Kidney Transplant: इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान ने किडनी ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में एक दशक के भीतर नया इतिहास रच दिया है।

आईजीआईएमएस की बड़ी कामयाबी- फोटो : Hiresh Kumar

IGIMS Kidney Transplant: बिहार की सियासत और सेहत व्यवस्था के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने उम्मीद की नई किरण जगा दी है। राजधानी पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) ने किडनी ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में एक दशक के भीतर नया इतिहास रच दिया है। पिछले दस वर्षों में संस्थान ने 138 मरीजों का सफल किडनी ट्रांसप्लांट कर उन्हें नई जिंदगी बख्शी है।

इस अहम उपलब्धि के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने डॉक्टरों और संस्थान के अधिकारियों को मुबारकबाद देते हुए कहा कि यह कामयाबी सिर्फ एक अस्पताल की नहीं, बल्कि पूरे राज्य की स्वास्थ्य नीति और दूरदर्शी सोच की जीत है।दरअसल, विश्व किडनी दिवस और किडनी ट्रांसप्लांट मीट-2026 के अवसर पर आईजीआईएमएस के मुख्य ऑडिटोरियम में एक खास कार्यक्रम आयोजित किया गया। अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि करीब दस साल पहले यहां किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू हुई थी, और आज उसका नतीजा सामने है कि 138 मरीजों को नई जिंदगी मिल चुकी है।

उन्होंने कहा कि जनता को बेहतर इलाज मुहैया कराना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसलिए संस्थान के पदाधिकारियों को यह भी सोचना चाहिए कि मरीजों की सहूलियत और इलाज की रफ्तार को और कैसे बेहतर बनाया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर किडनी ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में किसी उच्च स्तरीय ट्रेनिंग की जरूरत हो तो यहां के डॉक्टरों को देश-विदेश के बड़े चिकित्सा संस्थानों में भेजा जाए, ताकि इलाज की गुणवत्ता और भरोसा दोनों मजबूत हों।मंत्री ने यह भी ऐलान किया कि राज्य सरकार अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास में हरसंभव मदद करेगी। इसी सिलसिले में उन्होंने संस्थान में एनेस्थीसिया सिमुलेशन लेबोरेट्री और रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाओं का भी शुभारंभ किया।

इस कार्यक्रम में विधायक संजीव चौरसिया, संस्थान के डायरेक्टर डॉ. बिंदे कुमार, डॉ. ओम कुमार, डॉ. एन.आर. विश्वास और अमिताभ सिंह समेत नेफ्रोलॉजी विभाग के कई डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।कुल मिलाकर, आईजीआईएमएस की यह उपलब्धि सिर्फ मेडिकल साइंस की कामयाबी नहीं, बल्कि बिहार की स्वास्थ्य नीति, प्रशासनिक इरादे और डॉक्टरों की मेहनत का ऐसा संगम है जिसने सैकड़ों परिवारों को जिंदगी की नई उम्मीद दे दी है।