साफ होगा आम आदमी का सफर : अब जनरल कोच में भी मिलेगी AC बोगियों जैसे चलती ट्रेन में होगी सफाई, रेलवे का प्लान तैयार
भारतीय रेलवे ने अपने करोड़ों यात्रियों के लिए 'रिफार्म प्लान 2026' लॉन्च किया है। इसके तहत जनरल डिब्बों में अब हर घंटे सफाई होगी और AI कैमरों के जरिए स्वच्छता की डिजिटल निगरानी की जाएगी।
Patna - भारतीय रेलवे अब आम यात्रियों के सफर को सुगम और स्वच्छ बनाने के लिए एक बड़े बदलाव की ओर अग्रसर है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 'रिफार्म प्लान 2026' की घोषणा की है, जिसके तहत अगले 52 हफ्तों में 52 बड़े सुधार किए जाएंगे। इस योजना का सबसे प्रमुख केंद्र जनरल कोच में सफर करने वाले करोड़ों यात्री हैं, जिन्हें अब एसी कोच जैसी ही सफाई व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि अब यात्रा की श्रेणी के आधार पर सफाई में कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।
जनरल कोच के लिए विशेष 'स्टेशन-टू-स्टेशन' सफाई मॉडल
जनरल डिब्बों में सबसे बड़ी समस्या यह होती थी कि वे बाकी ट्रेन से जुड़े (Vestibule) नहीं होते, जिससे सफाई कर्मचारी चलती ट्रेन में वहां तक नहीं पहुंच पाते थे। अब इसका समाधान निकाल लिया गया है। नई योजना के तहत, जैसे ही ट्रेन स्टेशन पर रुकेगी, सफाई कर्मचारी नीचे उतरकर जनरल कोच में प्रवेश करेंगे। वहां टॉयलेट, कचरे के डिब्बे और पूरे कोच की सफाई सुनिश्चित की जाएगी। पीक ऑवर्स और ज्यादा भीड़ होने की स्थिति में हर एक घंटे पर सफाई का चक्र चलाया जाएगा।
AI और कंट्रोल रूम से होगी डिजिटल निगरानी
रेलवे ने सफाई व्यवस्था में कोताही को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। अब सफाई के बाद कोच की तस्वीरें सीधे कंट्रोल रूम को भेजी जाएंगी, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम यह जांचेगा कि सफाई मानकों के अनुरूप हुई है या नहीं। यदि सफाई में कोई कमी मिली, तो संबंधित वेंडर या ठेकेदार पर तुरंत जुर्माना लगाया जाएगा। भविष्य में रेलवे केवल उन्हीं ठेकेदारों को काम देगा जिनका 'क्लीनिंग स्टैंडर्ड' बेहतरीन होगा।
मार्ग-विशिष्ट टीमें और जवाबदेही तय
लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए रेलवे अब मार्ग-विशिष्ट (Route-Specific) टीमों की तैनाती कर रहा है। ये टीमें चलती ट्रेन में शौचालयों की मरम्मत, जलापूर्ति सुनिश्चित करने और कचरा निस्तारण के लिए जवाबदेह होंगी। रेल मंत्री के अनुसार, सेवा प्रदाताओं की स्पष्ट जवाबदेही तय की गई है ताकि यात्री सेवाओं की गुणवत्ता में स्थायी सुधार हो सके। इस योजना के जमीनी परिणाम अगले छह महीनों में पूरी तरह दिखने लगेंगे।
माल ढुलाई के लिए 'गति शक्ति' का विस्तार
यात्री सेवाओं के साथ-साथ रेलवे ने माल परिवहन को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए 'गति शक्ति माल टर्मिनल नीति' को और मजबूती दी है। पिछले तीन वर्षों में 18 राज्यों में 124 मल्टी-मॉडल टर्मिनल विकसित किए गए हैं, जिनसे करीब 20,000 करोड़ रुपये के वार्षिक राजस्व की संभावना है। अब रेलवे ने अगले पांच वर्षों में 500 ऐसे टर्मिनल विकसित करने का लक्ष्य रखा है। नई नीति के तहत अब रेल भूमि पर गोदाम और प्रसंस्करण इकाइयां बनाने की भी अनुमति दी गई है।
आर्थिक लाभ और भविष्य की राह
रेलवे की इन नई नीतियों से न केवल परिवहन लागत में कमी आएगी, बल्कि प्रदूषण के स्तर में भी सुधार होगा। अनुबंध की अवधि को 35 से बढ़ाकर 50 वर्ष कर दिया गया है, जिससे निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। इसके अलावा, थोक सीमेंट परिवहन नियमों के लागू होने से कई राज्यों में सीमेंट के दामों में भी कमी दर्ज की गई है। रेलवे का लक्ष्य माल गतिविधियों को सड़क और बंदरगाहों के साथ जोड़कर एक मजबूत लॉजिस्टिक नेटवर्क तैयार करना है।