अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर पटना जू को बड़ी सौगात, चार नए बाघों का हुआ नामकरण, अब पर्यटकों को दिखेंगे 10 टाइगर

पटना जू के चार नए बाघों का नाम रुद्र, पूर्णिमा, तेजस और सृष्टि रखा गया है। लोकार्पण के बाद अब पर्यटक इन चारों बाघों को भी करीब से देख सकेंगे।

Patna Zoo Unveils Four New Tigers - फोटो : news4nation

Patna Zoo : अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर बिहार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री राम चंद्र प्रसाद ने बुधवार को पटना जू (संजय गांधी जैविक उद्यान) को बड़ी सौगात दी। मंत्री ने चार नए बाघों का नामकरण कर उनका लोकार्पण किया और उन्हें आम पर्यटकों के लिए खोल दिया। इसके साथ ही पटना जू में बाघों की कुल संख्या बढ़कर 10 हो गई है।


पटना जू के चार नए बाघों का नाम रुद्र, पूर्णिमा, तेजस और सृष्टि रखा गया है। लोकार्पण के बाद अब पर्यटक इन चारों बाघों को भी करीब से देख सकेंगे। वन विभाग का मानना है कि नए बाघों के आने से संजय गांधी जैविक उद्यान का आकर्षण और बढ़ेगा तथा पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा होगा।


इस मौके पर मंत्री राम चंद्र प्रसाद ने कहा कि बिहार सरकार वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के संरक्षण के लिए लगातार काम कर रही है। बाघ न केवल देश की प्राकृतिक विरासत का प्रतीक हैं, बल्कि जंगलों के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने लोगों से वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सहयोग करने की अपील भी की।


क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस?

हर साल 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस (International Tiger Day) मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित टाइगर समिट के दौरान हुई थी। उस समय दुनिया भर में बाघों की घटती संख्या को देखते हुए बाघों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को बचाने के लिए वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने का निर्णय लिया गया था। इस दिवस का उद्देश्य लोगों को बाघों के संरक्षण, अवैध शिकार पर रोक और जंगलों की सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है।


भारत दुनिया में सबसे अधिक बाघों वाला देश है और वैश्विक बाघ संरक्षण में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर संरक्षण संबंधी कार्यक्रमों और जागरूकता अभियानों का विशेष महत्व होता है।


पटना जू में चार नए बाघों के सार्वजनिक प्रदर्शन से अब पर्यटकों को पहले की तुलना में अधिक आकर्षण देखने को मिलेगा। वन विभाग को उम्मीद है कि इससे न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता भी मजबूत होगी।

नरोत्तम की रिपोर्ट