Bihar Jamui Case: मारब सिक्सर की छहो गोली छाती में रे....जमुई कांड पर तेजस्वी के तंज से गरमाया बिहार, पढ़िए गमछे के रंग के एंगल पर सियासत का फरेब और महिला सुरक्षा का सच

Bihar Jamui Case: जमुई की घटना ने अब सिर्फ पुलिसिया कार्रवाई का सवाल नहीं छोड़ा है, बल्कि बिहार की सियासत में कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।तेजस्वी यादव ने व्यंग्य के माध्यम से सरकार के कार्यशैली पर सवाल खड़ा किया है...

तेजस्वी के तंज से गरमाया बिहार- फोटो : reporter

Bihar Jamui Case: जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ कथित बदसलूकी और उत्पीड़न का मामला अब बिहार की सियासत में भीषण राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है। वायरल वीडियो के सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को निशाने पर लेते हुए सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार पर तीखा तंज कसा है।

 जमुई में एक बेटी के साथ हुई घिनौनी और बरबरतापूर्ण घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है,  नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक तीखा और व्यंग्यात्मक संवाद साझा कर सरकार, खास तौर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और प्रशासन की कार्यशैली पर करारा प्रहार किया है।तेजस्वी यादव द्वारा गढ़े गए इस काल्पनिक और नाटकीय संवाद ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। इस व्यंग्य के जरिए उन्होंने सत्ता के गलियारों की प्राथमिकताओं पर सीधा सवाल उठाया है।व्यंग्य में यह दर्शाया गया है कि कैसे अपराध और अपराधियों की पहचान उनके कुकर्मों से न करके उनके गमछे के रंग या जाति से जोड़ने की कोशिश की जाती है। जब कानून की आड़ में राजनीतिक चश्मा पहना जाता है, तो न्याय का गला घुट जाता है।जब जमुई जैसी दहला देने वाली घटना घट रही थी, तब सत्ता के सर्वोच्च पदों पर बैठे लोग कथित तौर पर जातीय सम्मेलनों और राजनीतिक व्यस्तताओं में मशगूल थे। यही असंवेदनशीलता जनता के गुस्से को और भड़का रही है।

तेजस्वी यादव ने कहा कि जमुई की घटना शर्मनाक है और बिहार में महिलाओं व छात्राओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने सरकार के कुछ नेताओं की बयानबाजी को भी निशाने पर लिया। तेजस्वी ने फेसबुक पर एक व्यंग्यात्मक और नाटकीय संवाद पोस्ट किया। इस पोस्ट में उन्होंने मुख्यमंत्री और पुलिस अधिकारी के बीच काल्पनिक बातचीत के जरिए सरकार पर कटाक्ष किया। उन्होंने कथित तौर पर ‘गमछे के रंग’, ‘एआई’ और आरोपियों की जाति के बहाने सरकार पर राजनीतिक तंज कसा और आरोप लगाया कि मामले को जातीय और राजनीतिक चश्मे से देखने की कोशिश की जा सकती है।

तेजस्वी के इस व्यंग्य में भगवा और हरे रंग का जिक्र भी आया। उन्होंने इसी बहाने सरकार पर कथित राजनीतिक दोहरेपन का आरोप लगाया। पोस्ट का लहजा व्यंग्यात्मक  और इसका मकसद जमुई की घटना के बहाने सरकार की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक प्राथमिकताओं पर सवाल उठाना था।

बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर सरकार के दावे आए दिन खोखले साबित हो रहे हैं। एक तरफ हुक्मरान यह दलील देते हैं कि राज्य में कानून का राज है और बेटियां सुरक्षित हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे सरेआम कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं। ऐसे में जब नेता प्रतिपक्ष इस तरह के नाटकों और संवादात्मक व्यंग्यों के माध्यम से सरकार को घेरते हैं, तो यह साफ हो जाता है कि मामला बेहद संवेदनशील है और पीड़ित परिवार और राज्य की बेटियां आज भी न्याय की गुहार लगा रही हैं।

हीरेश कुमार