मुरेठा बांधकर नीतीश को सीएम पद से हटाने का संकल्प लेने वाले सम्राट चौधरी के बारे जानें- कौन हैं, क्यों बनने वाले हैं बिहार के 24वें मुख्यमंत्री

आक्रामक शैली में राजनीति करने के लिए जाने जाने वाले सम्राट चौधरी ने नीश को सीएम पद से हटाने वाला जो मुरेठा संकल्प लिया था अंततः वह 'दोस्ताना' रूप से पूरा हो रहा है.

Samrat Chaudhary- फोटो : news4nation

Samrat Chaudhary : कभी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए मुरेठा बांधकर संकल्प लेने वाले सम्राट चौधरी का सपना अब पूरा हो गया है। भाजपा विधायक दल ने उन्हें अपना नेता चुन लिया है और वे बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। उनका यह सफर संघर्ष, राजनीतिक बदलाव और आक्रामक शैली का उदाहरण माना जा रहा है। लालू से नीतीश और जीतन राम मांझी सबके साथ सियासत कर चुके सम्राट का कद मात्र 8 साल में भाजपा के सबसे बड़े नेता के रूप में हो गया।


कौन हैं सम्राट चौधरी?

16 नवंबर 1968 को खगड़िया जिले में जन्मे सम्राट चौधरी एक मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी राज्य के दिग्गज समाजवादी नेता रहे हैं, जो सात बार विधायक और सांसद रह चुके हैं तथा विधानसभा के उपाध्यक्ष भी रहे। उनकी मां पार्वती देवी भी तारापुर से दो बार विधायक रह चुकी हैं। सम्राट चौधरी की पत्नी का नाम ममता कुमारी है और उनके एक बेटा व एक बेटी हैं।


राजद से शुरुआत, कम उम्र में मंत्री बनने का मौका

सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से की। वर्ष 1999 में कम उम्र में उन्हें राबड़ी देवी मंत्रिमंडल में कृषि राज्य मंत्री बनाया गया, हालांकि कम उम्र को लेकर विवाद हुआ और बाद में उन्हें पद छोड़ना पड़ा।


जदयू और भाजपा तक का सफर

सम्राट चौधरी परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से 2000 और 2010 में विधायक चुने गए। बाद में उन्होंने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार में 2014 में शहरी विकास मंत्री के रूप में काम किया। जब जीतन राम मांझी मुख्यमंत्री बने, तब भी वे मंत्री रहे। इसके बाद उन्होंने जनता दल (यूनाइटेड) छोड़कर 2018 में भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया।


भाजपा में उनका कद तेजी से बढ़ा। उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया, फिर विधान परिषद सदस्य (MLC) बने और 2022 में विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष चुने गए। मार्च 2023 में भाजपा ने उन्हें बिहार प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी और बाद में वे उपमुख्यमंत्री बने।


मुरेठा संकल्प से सीएम कुर्सी तक

सम्राट चौधरी खास तौर पर उस समय चर्चा में आए, जब उन्होंने महागठबंधन सरकार के दौरान सार्वजनिक रूप से मुरेठा बांधकर यह ऐलान किया था कि जब तक नीतीश कुमार को सत्ता से नहीं हटाएंगे, तब तक इसे नहीं खोलेंगे। बाद में जब नीतीश कुमार एनडीए में शामिल हुए, तो उन्होंने अयोध्या में सरयू नदी में मुरेठा विसर्जित कर अपना संकल्प पूरा होने की बात कही।


कोइरी (कुशवाहा) समाज से आने वाले सम्राट चौधरी को भाजपा का मजबूत ओबीसी चेहरा माना जाता है। अब उनके मुख्यमंत्री बनने के साथ ही बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो रही है।