Ex IPS Amitabh Das : जानिए किस जाति के हैं पूर्व IPS अमिताभ दास, बेबाक बयानबाजी को लेकर क्यों रहते हैं सुर्खियों में
Ex IPS Amitabh Das : पूर्व आईपीएस अमिताभ दास की जाति को लेकर लोगों के मन में सस्पेंस हैं. जानिए किस जाति के हैं पूर्व अधिकारी.....
PATNA : 1994 बैच के बिहार कैडर के अधिकारी रहे अमिताभ दास को उनकी बेबाकी और सत्ता से सीधे सवाल करने वाले अंदाज़ के लिए जाना जाता है। वे अपने कार्यकाल के दौरान जितने चर्चित रहे, उससे कहीं अधिक अपनी अनिवार्य सेवानिवृत्ति और उसके बाद के सामाजिक-राजनीतिक सक्रियता के कारण सुर्खियों में बने रहते हैं। कई लोगों के मन में उनकी जाति को लेकर उत्सुकता बनी रहती है। कई लोग बताते हैं की वे दलित समुदाय से आते हैं, तो कुछ का मानना है की वे बंगाली हैं। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने खुँद अपनी जाति का खुलासा करते हुए कहा की मैं मिथिला का कर्ण कायस्थ हूँ। उन्होंने कहा की मैं सामान्य कोटे से आईपीएस के लिए चयनित हुआ था।
अमिताभ दास का पुलिस करियर विवादों और साहसिक खुलासों से भरा रहा है। उन्होंने रणवीर सेना जैसे प्रतिबंधित संगठनों और सफेदपोश राजनेताओं के बीच के कथित संबंधों पर गोपनीय रिपोर्ट देकर महकमे में हलचल मचा दी थी। उनके समर्थकों का मानना है कि भ्रष्टाचार और व्यवस्था के भीतर की कमियों को उजागर करने की कीमत उन्हें अपनी सेवा गँवाकर चुकानी पड़ी। साल 2018 में केंद्र सरकार ने उन्हें 'अनिवार्य सेवानिवृत्ति' दे दी थी, जिसे उन्होंने व्यवस्था का प्रतिशोध करार दिया था।
रिटायरमेंट के बाद भी अमिताभ दास शांत नहीं बैठे हैं। वे वर्तमान में बिहार की राजनीति, जातीय जनगणना, और मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर एक मुखर आलोचक की भूमिका निभा रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों तक, वे सरकार की नीतियों की तार्किक और कभी-कभी बेहद तीखी आलोचना करते नजर आते हैं। उन्होंने कई बार दलित और पिछड़े वर्गों के अधिकारों की वकालत की है, जिसके कारण उन्हें एक 'एक्टिविस्ट-ब्यूरोक्रेट' के तौर पर देखा जाता है। उनकी पहचान केवल एक पुलिस अधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि वे एक प्रखर लेखक और विचारक भी हैं। वे अक्सर इतिहास, दर्शन और वर्तमान प्रशासनिक चुनौतियों पर लेख लिखते रहते हैं। उनके व्याख्यानों में अक्सर व्यवस्था के भीतर व्याप्त जातिवाद और भाई-भतीजावाद पर कड़ा प्रहार देखने को मिलता है। यही कारण है कि वे युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक बड़े वर्ग के बीच काफी लोकप्रिय हैं, जो उन्हें व्यवस्था के खिलाफ एक निडर आवाज मानते हैं।
हालिया दिनों में अमिताभ दास कई कानूनी लड़ाइयों और जनहित याचिकाओं (PIL) के माध्यम से भी चर्चा में रहे हैं। वे अक्सर भ्रष्टाचार के बड़े मामलों की सीबीआई जाँच की माँग करते रहते हैं। उनका मानना है कि लोकतंत्र में एक नागरिक और पूर्व अधिकारी के रूप में यह उनका कर्तव्य है कि वे सत्ता की जवाबदेही तय करें। चाहे वे सेवा में हों या बाहर, अमिताभ दास का व्यक्तित्व बिहार के प्रशासनिक और सार्वजनिक विमर्श में एक अनिवार्य और विवादास्पद हिस्सा बना हुआ है।