Krishna Janmashtami: आज धरा पर अवतरित होंगे कन्हैया, बन रहा है द्वापर युग सा अलौकिक महासंयोग, मथुरा-द्वारका सी सजी पटना की ठाकुरबाड़ियां

rishna Janmashtami: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की उदयाकालिक अष्टमी तिथि को देवाधिदेव भगवान श्रीकृष्ण का दिव्य जन्मोत्सव अत्यंत श्रद्धा, उल्लास एवं भक्तिभाव के साथ आयोजित हो रहा है।

आज धरा पर अवतरित होंगे कन्हैया- फोटो : reporter

Krishna Janmashtami: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की उदयाकालिक अष्टमी तिथि को देवाधिदेव भगवान श्रीकृष्ण का दिव्य जन्मोत्सव अत्यंत श्रद्धा, उल्लास एवं भक्तिभाव के साथ आयोजित हो रहा है। इस वर्ष का यह पावन अवसर अत्यंत दुर्लभ एवं अलौकिक महासंयोग लेकर आया है, जो द्वापर युग के पुण्यकाल का स्मरण कराता है। इस कालखंड में अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, भृगुवार (शुक्रवार) तथा वृषभ लग्न का एक साथ विद्यमान होना शास्त्रानुसार अत्यंत कल्याणकारी है। पद्मपुराण तथा गौतमी तंत्र संहिता के अनुसार इस अलौकिक सुयोग में 'जयंती योग' के साथ-साथ 'हर्षग' एवं 'सर्वार्थ सिद्धि योग' का निर्माण हो रहा है। इस वर्ष गृहस्थ एवं साधु-संत-वैष्णव समाज एक ही दिन व्रत का पालन कर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का आमोद-प्रमोद मना रहे हैं।

धार्मिक अनुष्ठान, मुहूर्त एवं मोहरात्रि की महत्ता

अष्टमी तिथि का प्रभाव सूर्योदय से प्रारंभ होकर रात्रि के अंतिम प्रहर तक रहेगा, जबकि रोहिणी नक्षत्र का शुभ संयोग रात्रि ११:२२ बजे तक विद्यमान रहेगा। अहोरात्र (२४ घंटे) निर्जल व्रत धारण करने वाले श्रद्धालु अगले दिन प्रातःकाल शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करेंगे। सनातन शास्त्र परंपरा में जन्माष्टमी की रात्रि को 'मोहरात्रि' की संज्ञा दी गई है। इस सिद्ध रात्रि में की गई अध्यात्म-साधना, नाम-जप, मंत्र-जाप एवं तपस्या से मनुष्य को ईश्वर-प्रदत्त असीम आध्यात्मिक ऊर्जा एवं परम शांति की प्राप्ति होती है। जन्मोत्सव की शुभ घड़ी में चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में गोचर करेंगे, जो सांसारिक जीवों के लिए सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य एवं मानसिक शांति का संवाहक है।

राजधानी पटना के प्रमुख देवालयों में भव्य आयोजन

पटना नगर के प्रमुख देवालयों एवं ठाकुरबाड़ियों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की भव्य एवं अलौकिक तैयारियां की गई हैं:इस्कॉन मंदिर (बुद्ध मार्ग): इस भव्य मंदिर का मुख्य आकर्षण इसके तीन गर्भगृह हैं। जन्मोत्सव के अवसर पर संपूर्ण मंदिर परिसर की नैसगिक पुष्प-सज्जा तथा विद्युत-आभा मथुरा-वृंदावन एवं द्वारकापुरी की अनुभूति कराती है।

मीठापुर स्थित गौड़ीय मठ, गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी तथा प्रसिद्ध महावीर मंदिर में भगवान के बाल-स्वरूप के दर्शन हेतु श्रद्धालुओं का अपार जनसैलाब उमड़ रहा है।श्री जगन्नाथ मंदिर (नौजर घाट, पटना सिटी) भगवान श्रीकृष्ण अपने भ्राता बलभद्र एवं भगिनी सुभद्रा के साथ दिव्य रूप में विराजमान हैं।

बिहार की प्राचीन वैष्णव परंपरा एवं अनूठे देवालय

बिहार की पावन भूमि केवल ऐतिहासिक वैभव की साक्षी नहीं है, अपितु यहाँ मगध से लेकर भोजपुर और सारण तक भगवान श्रीकृष्ण विभिन्न अद्वितीय रूपों में पूजित हैं।श्री रुक्मिणी नाथ मंदिर शेरघाटी के हटिया रोड पर स्थित  देवालय संपूर्ण भारतवर्ष में अद्वितीय है। यहाँ के मुख्य गर्भगृह में भगवान श्रीकृष्ण के साथ उनकी अर्धांगिनी देवी रुक्मिणी तथा उनकी नित्य-प्रिया श्रीराधा की प्रतिमाएं एक साथ स्थापित हैं, जो अनन्य प्रेम एवं समर्पण का प्रतीक हैं।डुमरांव, बक्सर का बिहारी जी मंदिर  डुमरांव राजपरिवार से संबद्ध है। यह ऐतिहासिक मंदिर विगत चार शताब्दियों  से अधिक समय से वैष्णव परंपरा का संवर्धन कर रहा है। यहाँ जन्माष्टमी, राधाष्टमी तथा फागोत्सव के अवसर पर विशेष शास्त्रीय पूजन एवं अनुष्ठान संपन्न होते हैं।यह पावन पर्व बिहार की प्राचीन भक्ति-चेतना, स्थापत्य कला एवं विविध रूप-रंगों में रची-बसी कृष्ण-संस्कृति का साक्षात प्रमाण है।