बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी पहल: निगरानी, SVU और EOU का संयुक्त प्रशिक्षण, ट्रैप और डीए मामलों की बारीकियों से अवगत हुए अधिकारी

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राज्य की तीन प्रमुख जांच एजेंसियां निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, स्पेशल विजिलेंस यूनिट और आर्थिक अपराध इकाई की ओर से एक दिवसीय संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया...

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी पहल- फोटो : अनिल कुमार

Patna : बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई को और अधिक प्रभावी और मजबूत बनाने के उद्देश्य से राज्य की तीन प्रमुख जांच एजेंसियों ने पहली बार एक साथ मिलकर काम करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसके तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की ओर से एक विशेष एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।


नव पदस्थापित एसपी और डीएसपी समेत अधिकारियों ने लिया हिस्सा

इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम में तीनों प्रमुख जांच एजेंसियों के नव पदस्थापित पुलिस अधीक्षक (SP), पुलिस उपाधीक्षक (DSP) सहित तमाम जांच अधिकारियों और कर्मियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य फील्ड में तैनात अधिकारियों को आधुनिक और पेशेवर तरीके से जांच के गुर सिखाना था।


ट्रैप कार्रवाई और आय से अधिक संपत्ति (DA केस) के कानूनी पहलुओं पर जोर

प्रशिक्षण के दौरान भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में अचूक 'ट्रैप कार्रवाई' करने और 'आय से अधिक संपत्ति' (Disproportionate Assets - DA केस) के मामलों की तकनीकी एवं कानूनी बारीकियों को विस्तार से समझाया गया। साथ ही, अपराधियों के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य संकलन, तकनीकी सर्विलांस और कानूनी पहलुओं की जानकारी दी गई ताकि अदालत में दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जा सके।


जांच प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना मुख्य उद्देश्य

इस संयुक्त कार्यशाला के आयोजन का मुख्य मकसद प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों की क्षमता का विकास करना है, जिससे भ्रष्टाचार के मामलों में त्वरित, पारदर्शी और ठोस कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। एक ही मंच पर तीनों एजेंसियों के आने से आपसी समन्वय और सूचनाओं के आदान-प्रदान में भी और अधिक तेजी आएगी।


सुशासन और जीरो टॉलरेंस की नीति को मिल रहा बढ़ावा

बिहार सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति को जमीन पर उतारने में इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम बेहद अहम साबित होते हैं। इन एजेंसियों के समन्वित प्रयासों से राज्य में भ्रष्ट तत्वों और अनियमितताओं में लिप्त अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ शिकंजा और अधिक कसने की उम्मीद है।


अनिल की रिपोर्ट