Bihar News : प्रोफ़ेसर बनकर भावुक हुए सीएम नीतीश के ख़ास मंत्री अशोक चौधरी, कहा पिता के सपने को किया पूरा...

PATNA : बिहार सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग के मंत्री अशोक चौधरी अब राजनीति के मैदान के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं। लंबे इंतजार के बाद, सोमवार को उन्हें सहायक प्रोफेसर (Assistant Professor) का आधिकारिक नियुक्ति पत्र मिल गया है। पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति उपेंद्र प्रसाद सिंह ने उन्हें यह नियुक्ति पत्र सौंपा, जिसके बाद उन्होंने राजधानी पटना के प्रतिष्ठित अनुग्रह नारायण (A.N.) कॉलेज के राजनीति विज्ञान विभाग में अपना योगदान दिया।

इस उपलब्धि पर मंत्री अशोक चौधरी भावुक नजर आए। उन्होंने इसे अपने दिवंगत पिता का सपना बताया। अपने फेसबुक पोस्ट में मंत्री अशोक चौधरी ने लिखा की आपका सपना साकार हुआ, पापा। जो आप देखना चाहते थे... वो आज हो रहा है......आज आप स्वयं यहाँ नहीं हैं, लेकिन जो आपने मेरे लिए सोचा था - वो सपना आज आँखों के सामने पूरा होता दिख रहा है। आप कभी नहीं चाहते थे कि मैं राजनीति की उठापटक में उलझूँ। आपकी इच्छा थी कि मैं शिक्षा की राह चुनूँ, प्रोफेसर बनूँ और एक स्थिर, सम्मानित जीवन जीऊँ। इसीलिए आपने पीएचडी करवाई - मेरी आर्थिक स्थिरता के लिए, मेरे सुरक्षित भविष्य के लिए।

उस समय आपकी बात जिद लगती थी... आज समझ आता है वो जिद नहीं, दूरदर्शिता थी। शिक्षा के प्रति आपका वो प्रेम, वो समर्पण आज भी मेरे भीतर जीता है। लेकिन आपने मेरा जज़्बा देखा, जनसेवा का पैशन देखा और एक पिता की तरह समझौता किया। जो हर पिता अपने बेटे के लिए करता है। आपने प्रोफेसर एस. पी. शाही जी को कभी मेरे सामने, कभी मेरी पीठ पीछे बार-बार यही बताया कि आपकी दिली इच्छा है कि आपका बेटा प्रोफेसर बने। वो लम्हे जब आप उनसे यह कहते थे... शायद उस समय मुझे उसका मोल नहीं पता था। लेकिन आज जब उसी राह पर चल रहा हूँ तो आपकी हर बात याद आती है। प्रोफेसर शाही जी के सामने की गई वो बातें, आपकी वो उम्मीद आज साकार हो रही है। लोग प्रोफेसर होकर मंत्री बनते हैं और मैं मंत्री बनने के बाद प्रोफेसर बन रहा हूँ। 

आज बिहार विभूति डॉ. अनुग्रह नारायण सिंह को नमन करते हुए प्रो. एस.पी शाही जी, AN कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो. रेखा रानी  एवं सम्मानित शिक्षकों की उपस्थिति में सहायक प्रोफेसर के रूप में AN College के राजनीति शास्त्र विभाग में अपना योगदान देने जा रहा हूं। यह आपकी शिक्षा, आपके आशीर्वाद और आपके संस्कारों का ही फल है। यह संभव हुआ तो सिर्फ इसलिए - क्योंकि आप थे। मुझे पता है - आज आप होते तो सबसे ज़्यादा खुश होते। आपका स्नेह और आशीर्वाद सदैव बना रहे।