MLA Raju Kumar Singh Case: हर्ष फायरिंग केस में साहेबगंज से विधायक राजू सिंह को लगा तगड़ा झटका, दोषसिद्धि पर रोक से हाईकोर्ट का इनकार, जाएंगे जेल!

MLA Raju Kumar Singh Case: बिहार के साहेबगंज से विधायक राजू कुमार सिंह को हर्ष फायरिंग के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से दोषसिद्धि पर तत्काल राहत नहीं मिली। ...

MLA Raju Kumar Singh Case: बिहार के साहेबगंज से विधायक राजू कुमार सिंह को हर्ष फायरिंग के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से दोषसिद्धि पर तत्काल राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने उनकी उस अर्जी पर तत्काल रोक लगाने से इनकार किया, जिसमें निचली अदालत के दोषसिद्धि के फैसले को निलंबित करने की मांग की गई थी। अदालत ने मामले में दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा और मृतका के परिजनों को भी पक्ष रखने का निर्देश दिया।

मामला वर्ष 2018 की नववर्ष की रात का है। दक्षिण दिल्ली के फतेहपुर बेरी स्थित फार्महाउस में नए साल के जश्न के दौरान कथित हर्ष फायरिंग हुई थी। इसी दौरान गोली लगने से डॉ. अर्चना गुप्ता की मौत हो गई थी। मामले की सुनवाई के बाद दिल्ली की विशेष अदालत ने राजू कुमार सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 पार्ट-2 के तहत दोषी ठहराया था। साथ ही आर्म्स एक्ट के प्रावधानों के तहत भी उन्हें दोषी माना गया।

इसके बाद 4 जुलाई 2026 को निचली अदालत ने राजू कुमार सिंह को चार साल की सजा सुनाई थी। अदालत ने उन पर 25 लाख रुपये का मुआवजा भी लगाया, जिसे मृतका के परिवार को दिए जाने का निर्देश दिया गया था। आर्म्स एक्ट के तहत भी अलग सजा सुनाई गई थी।

निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए राजू कुमार सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी ओर से दोषसिद्धि और सजा दोनों पर रोक लगाने की मांग की गई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अपराध की गंभीरता का उल्लेख करते हुए तत्काल दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार किया और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा।

हालांकि, इसके बाद मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ। 28 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट ने चार साल की सजा को निलंबित कर दिया, क्योंकि अदालत ने माना कि अपील की अंतिम सुनवाई निकट भविष्य में होने की संभावना नहीं है। राजू कुमार सिंह को जमानत संबंधी शर्तों के साथ राहत दी गई। वहीं, उनकी दोषसिद्धि पर रोक की अर्जी अलग से सुनवाई के लिए लंबित रही।

इस तरह इस मामले में दोषसिद्धि पर रोक और सजा के निलंबन को अलग-अलग कानूनी राहत के रूप में देखना होगा। फिलहाल निचली अदालत की दोषसिद्धि पर तत्काल रोक नहीं लगी है, जबकि चार साल की सजा को हाईकोर्ट ने निलंबित कर दिया है। मामले की आगे की सुनवाई में दोषसिद्धि पर रोक की अर्जी पर अदालत का रुख महत्वपूर्ण होगा।

दिल्ली से धीरज कुमार सिंह की रिपोर्ट