बकाश्त भूमि से जुड़ी समस्याओं पर नीतीश सरकार का बड़ा ऐलान, गठित हुई कमेटी, छात्रा की मौत और फ्लाईओवर परियोजना पर उठे सवाल

Bihar Legislative Council- फोटो : news4nation

Bihar Vidhan Parishad : बिहार विधान परिषद में बुधवार को कार्यवाही के दौरान कई अहम मुद्दों पर सदस्यों ने सरकार को घेरा। बकाश्त भूमि की समस्या, मसौढ़ी में मैट्रिक छात्रा की मौत और फ्लाईओवर के नीचे विकसित पार्किंग स्थल की गुणवत्ता को लेकर सदन में तीखी चर्चा हुई।


जदयू के एमएलसी नीरज कुमार ने बकाश्त भूमि से जुड़ी समस्याओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य में बकाश्त जमीन को लेकर व्यावहारिक कठिनाइयाँ बनी हुई हैं और स्पष्ट नीतिगत समाधान की आवश्यकता है। उन्होंने याद दिलाया कि बिहार भूमि सुधार अधिनियम 1950 के तहत जमींदारी प्रथा समाप्त की गई थी, लेकिन बकाश्त भूमि की परिभाषा और उसके निपटारे को लेकर अब भी अस्पष्टता है। उन्होंने कानून में संशोधन की मांग की।


इस पर उपमुख्यमंत्री सह मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने जवाब देते हुए कहा कि बकाश्त जमीन को रैयती भूमि का दर्जा प्राप्त नहीं है। उन्होंने बताया कि इस विषय की समीक्षा के लिए विभाग ने एक समिति गठित की है, जो रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

मैट्रिक छात्रा की कथित आत्महत्या का मामला

कार्यवाही की शुरुआत में राजद की एमएलसी शशि यादव ने मसौढ़ी में एक मैट्रिक छात्रा की कथित आत्महत्या का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि छात्रा को परीक्षा केंद्र पर 10 मिनट देर से पहुंचने के कारण परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई, जिसके बाद उसने ट्रेन से कटकर जान दे दी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से नहीं सुन रही है और यह विषय पहले भी सदन में उठाया जा चुका है। शशि यादव ने मेदांता अस्पताल के समीप तथा अन्य स्थानों से गरीबों को हटाए जाने का मुद्दा भी उठाया।


बास्केटबॉल और बैडमिंटन कोर्ट पर सवाल 

वहीं राजद के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने नगर विकास एवं आवास विभाग की एक परियोजना पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि फ्लाईओवर के नीचे पार्किंग स्थल विकसित करने की योजना के तहत आर ब्लॉक और मीठापुर में वर्ष 2024 में 30 लाख रुपये की लागत से बास्केटबॉल और बैडमिंटन कोर्ट बनाए गए थे, जो एक वर्ष के भीतर ही जर्जर हो गए। उन्होंने यह भी कहा कि स्वयं बैडमिंटन खिलाड़ी होने के नाते वे बता सकते हैं कि बनाए गए कोर्ट मानकों पर खरे नहीं उतरते।


इस पर विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया कि उनके विभाग की ओर से केवल एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) जारी किया गया था। इन मुद्दों को लेकर सदन में चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई बार तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

अभिजीत की रिपोर्ट