Mukesh Sahani House Arrest: VIP सुप्रीमो मुकेश सहनी को किया गया हाउस अरेस्ट, निषाद समाज के कार्यक्रम में जाने से रोका गया
विकासशील इंसान पार्टी के सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी को हाउस अरेस्ट किए जाने का मामला सियासी गलियारों में तूल पकड़ता जा रहा है।
Mukesh Sahani House Arrest: विकासशील इंसान पार्टी के सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी को उत्तर प्रदेश में कथित तौर पर हाउस अरेस्ट किए जाने का मामला सियासी गलियारों में तूल पकड़ता जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि लखनऊ स्थित उनके आवास पर उत्तर प्रदेश प्रशासन ने उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया, ताकि वह शाहजहांपुर में आयोजित निषाद समाज के एक कार्यक्रम में शामिल न हो सकें। इस कार्रवाई के बाद सियासत गरमा गई है और इसे लेकर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।
मुकेश सहनी ने प्रशासन की इस कार्रवाई पर कड़ा एतराज जताते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बिना किसी स्पष्ट कारण के उनके आवास तक सीमित कर दिया गया और शाहजहांपुर जाने की अनुमति नहीं दी गई। सहनी का कहना है कि किसी जनप्रतिनिधि को सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने से रोकना लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है।
वीआईपी सुप्रीमो ने उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह कदम राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक और जनप्रतिनिधि को शांतिपूर्ण तरीके से लोगों के बीच जाने और अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार है। यदि किसी को बिना उचित कारण के रोका जाता है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
बताया जा रहा है कि मुकेश सहनी शाहजहांपुर में आयोजित निषाद समाज के एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने वाले थे। इससे पहले ही पुलिस और प्रशासन की टीम उनके लखनऊ स्थित आवास पर पहुंच गई और उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया और अपने समर्थकों के माध्यम से इस कार्रवाई का विरोध दर्ज कराया।
इस घटनाक्रम के बाद वीआईपी कार्यकर्ताओं और निषाद समाज के लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि सामाजिक कार्यक्रमों में भी राजनीतिक हस्तक्षेप किया जा रहा है, जबकि प्रशासन की ओर से इस कार्रवाई के पीछे क्या आधिकारिक कारण थे, इस पर विस्तृत बयान का इंतजार है।
फिलहाल यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। एक तरफ मुकेश सहनी इसे लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों पर हमला बता रहे हैं, तो दूसरी ओर प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।