पंचायत से लेकर राष्ट्रपति तक का चुनाव लड़ने वाले ‘धरती पकड़’ का निधन, बिहार के सियासी सितारा ने लड़ा 281 चुनाव
नागरमल बाजोरिया की खासियत यह थी कि चुनाव उनके लिए सिर्फ जीत-हार का माध्यम नहीं था, बल्कि लोकतंत्र में भागीदारी का एक जरिया था। अलग-अलग रिपोर्टों में उनके द्वारा लड़े गए चुनावों की संख्या 281 से अधिक बताई गई है।
Nagarmal Bajoria : पंचायत से लेकर राष्ट्रपति तक के चुनावों में किस्मत आजमा चुके बिहार की चुनावी राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाले और ‘धरती पकड़’ के नाम से मशहूर नागरमल बाजोरिया का निधन हो गया है। उन्होंने 97 वर्ष की उम्र में पटना के पीएमसीएच में गुरुवार को अंतिम सांस ली। पिछले करीब 10 से 15 दिनों से उनकी तबीयत खराब थी और उनका इलाज पीएमसीएच में चल रहा था। निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर को भागलपुर ले जाया गया है।
नागरमल बाजोरिया का नाम बिहार ही नहीं, बल्कि देश की चुनावी राजनीति में अनोखे उम्मीदवार के तौर पर लिया जाता रहा है। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक सफर में पंचायत से लेकर विधानसभा, विधान परिषद और लोकसभा तक के चुनावों में किस्मत आजमाई। इतना ही नहीं, उन्होंने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में भी नामांकन दाखिल कर अपनी दावेदारी पेश की थी। लगातार चुनाव मैदान में उतरने की वजह से ही उन्हें ‘धरती पकड़’ के नाम से पहचान मिली।
चुनाव लड़ना ही बन गया पहचान
नागरमल बाजोरिया की खासियत यह थी कि चुनाव उनके लिए सिर्फ जीत-हार का माध्यम नहीं था, बल्कि लोकतंत्र में भागीदारी का एक जरिया था। अलग-अलग रिपोर्टों में उनके द्वारा लड़े गए चुनावों की संख्या 281 से अधिक बताई गई है। उन्होंने बड़े राजनीतिक चेहरों के खिलाफ भी चुनावी मैदान में उतरने से कभी परहेज नहीं किया।
साल 2012 में उन्होंने राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए भी नामांकन दाखिल किया था। हालांकि उनका नामांकन स्वीकार नहीं हुआ। इसके बावजूद राष्ट्रपति चुनाव में उनकी दावेदारी ने उन्हें देशभर में चर्चा में ला दिया था।
भागलपुर से रहा गहरा जुड़ाव
नागरमल बाजोरिया का जन्म लाहौर में हुआ था। देश के विभाजन के बाद उनका परिवार भागलपुर आकर बस गया और यही शहर उनकी कर्मभूमि बन गया। लंबे समय तक उन्होंने भागलपुर में सामाजिक गतिविधियों के साथ-साथ चुनावी राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई। उनके चुनावी सफर को लेकर कई दिलचस्प किस्से भी चर्चित रहे। वह बार-बार चुनाव मैदान में उतरते रहे और हर बार उनका अंदाज लोगों के बीच चर्चा का विषय बन जाता था। उम्र बढ़ने के बावजूद चुनाव और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति उनका उत्साह कम नहीं हुआ।
हालांकि आम तौर पर नागरमल बाजोरिया को चुनावों में लगातार किस्मत आजमाने वाले उम्मीदवार के रूप में याद किया जाता है, लेकिन उनके बारे में यह दावा कि उन्होंने जीवन में कभी कोई चुनाव नहीं जीता, पूरी तरह निर्विवाद नहीं है। उन्होंने एक समय भागलपुर नगरपालिका का चुनाव जीतने का भी दावा किया था।
चुनावी राजनीति का अनोखा अध्याय खत्म
बढ़ती उम्र के साथ नागरमल बाजोरिया पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे थे। करीब दो सप्ताह से उनकी तबीयत अधिक खराब थी और उन्हें इलाज के लिए पटना के पीएमसीएच में भर्ती कराया गया था। गुरुवार को इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।