एमएलसी चुनाव में NDA ने दिया उपेंद्र कुशवाहा को बड़ा झटका, बेटे दीपक प्रकाश देंगे मंत्री पद से इस्तीफा !

भाजपा ने चार, जदयू ने चार और लोजपा (रामविलास) ने एक उम्मीदवार उतारकर सभी उपलब्ध सीटों पर दावा ठोक दिया है। इसके साथ ही दीपक प्रकाश के विधान परिषद पहुंचने की संभावनाएं लगभग समाप्त हो गई हैं।

Upendra Kushwaha/Deepak Prakash- फोटो : news4nation

Bihar MLC Election :  बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए एनडीए ने अपने नौ उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। भाजपा, जदयू और लोजपा (रामविलास) की ओर से घोषित सूची में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश का नाम नहीं होने से राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि एनडीए की इस सूची ने राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है।


भाजपा ने चार, जदयू ने चार और लोजपा (रामविलास) ने एक उम्मीदवार उतारकर सभी उपलब्ध सीटों पर दावा ठोक दिया है। इसके साथ ही दीपक प्रकाश के विधान परिषद पहुंचने की संभावनाएं लगभग समाप्त हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव दीपक प्रकाश के लिए सदन की सदस्यता हासिल करने का सबसे आसान और सुरक्षित रास्ता माना जा रहा था, लेकिन एनडीए नेतृत्व ने उन्हें मौका नहीं दिया।

मंत्री पद छोड़ना तय !

दरअसल, दीपक प्रकाश बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री हैं, लेकिन वे विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार किसी भी व्यक्ति को मंत्री बनने के छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना जरूरी होता है। यदि ऐसा नहीं होता है तो उसे मंत्री पद छोड़ना पड़ता है। ऐसे में अब दीपक प्रकाश के सामने मंत्री पद बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।


कुशवाहा परिवार में सब सेट 

इस घटनाक्रम को उपेंद्र कुशवाहा के लिए भी एक राजनीतिक झटके के तौर पर देखा जा रहा है। उपेंद्र कुशवाहा स्वयं राज्यसभा सांसद हैं, उनकी पत्नी स्नेहलता कुशवाहा विधायक हैं, जबकि बेटे दीपक प्रकाश राज्य सरकार में मंत्री हैं। इसके अलावा उनकी बहू साक्षी मिश्रा कुशवाहा भी राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहती हैं। ऐसे में कुशवाहा परिवार बिहार की राजनीति में एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार के रूप में देखा जाता है। हालांकि, एनडीए की ताजा सूची में दीपक प्रकाश को जगह नहीं मिलने के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि गठबंधन के भीतर राष्ट्रीय लोक मोर्चा की राजनीतिक हैसियत और प्रभाव कितना मजबूत है। 


एनडीए उम्मीदवारों की जीत तय

विधान परिषद चुनाव के मौजूदा गणित पर नजर डालें तो एक सीट जीतने के लिए लगभग 25 विधायकों के वोटों की जरूरत होती है। एनडीए के पास अपने सभी नौ उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या बल मौजूद है। ऐसे में गठबंधन ने किसी अतिरिक्त उम्मीदवार के लिए जगह नहीं छोड़ी है।