Flood News:तबाही का अभी नही टला है खतरा! 72 घंटे बेहद अहम, 50 लाख घन मीटर पानी वाली झील कभी भी मचा सकती है कहर

Flood News: भोटेकोशी नदी क्षेत्र में विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद अब एक नई बैरियर झील ने निचले इलाकों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। चीन ने आशंका जताई है कि यह प्राकृतिक झील अगले 72 घंटे में टूट सकती है...

तबाही का अभी नही टला है खतरा!- फोटो : social Media

Flood News: नेपाल में कुदरत का कहर अभी थमा भी नहीं है कि एक नई आफत ने पूरे इलाके में खौफ बढ़ा दिया है। भोटेकोशी नदी क्षेत्र में विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद अब एक नई बैरियर झील ने निचले इलाकों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। चीन ने आशंका जताई है कि यह प्राकृतिक झील अगले 72 घंटे में टूट सकती है, जिसके बाद भारी मात्रा में पानी अचानक नीचे की ओर बह सकता है। ऐसी सूरत में पहले से बाढ़ की मार झेल रहे इलाकों में दोबारा तबाही मचने का अंदेशा है।26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल और तिब्बत में संयुक्त रूप से 392 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,468 लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव दस्ते मलबे में जिंदगी तलाश रहे हैं, लेकिन टूटी सड़कें, बह चुके पुल और दुर्गम पहाड़ी रास्ते रेस्क्यू ऑपरेशन में बड़ी रुकावट बने हुए हैं।

72 घंटे पर टिकी निगाहें, चीन ने जारी किया अलर्ट

चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने नेपाल को नई बैरियर झील को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। रिपोर्टों के मुताबिक छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास यह झील बनी है। गुरुवार सुबह तक इसमें करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था और झील ओवरफ्लो करने लगी थी। अगले तीन दिनों में इसमें करीब 30 लाख घन मीटर अतिरिक्त पानी आने का अनुमान है। यानी कुल जलराशि करीब 50 लाख घन मीटर तक पहुंच सकती है।अगर प्राकृतिक बांध पानी का दबाव सह नहीं पाया और झील फट गई, तो पानी का तेज बहाव भोटेकोशी नदी प्रणाली के निचले इलाकों की ओर पहुंच सकता है। यही वजह है कि अगले 72 घंटे को बेहद नाजुक माना जा रहा है।

लोगों से नदी किनारे नहीं जाने की अपील

नेपाल के जल एवं मौसम विज्ञान विभाग ने भोटेकोशी और आसपास के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा है। लोगों से नदी के किनारों से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है। प्रशासन की चिंता सिर्फ स्थानीय आबादी तक सीमित नहीं है, क्योंकि बचाव और राहत अभियान में जुटे सुरक्षाकर्मियों तथा यात्रियों के लिए भी अचानक बाढ़ गंभीर खतरा बन सकती है।

आखिर क्या होती है बैरियर झील?

बैरियर झील सामान्य झील से बिल्कुल अलग होती है। जब भूस्खलन, ग्लेशियर का टूटना, चट्टान या भारी मलबा नदी के रास्ते में जमा होकर पानी का बहाव रोक देता है, तो उसके पीछे पानी इकट्ठा होने लगता है। इसी तरह बनी झील को प्राकृतिक बैरियर या डैम्ड झील कहा जाता है।इसका सबसे बड़ा खतरा यह है कि प्राकृतिक बांध अक्सर मिट्टी, चट्टान, बर्फ और मलबे से बना होता है। अगर पानी का दबाव बढ़ जाए और यह अवरोध टूट जाए, तो जमा पानी अचानक तेज रफ्तार से नीचे की ओर दौड़ सकता है। रास्ते में आने वाले गांव, पुल, सड़कें और दूसरी संरचनाएं इसकी चपेट में आ सकती हैं।

ग्लेशियर टूटने के बाद शुरू हुई थी तबाही

हालिया फ्लैश फ्लड की शुरुआत को लेकर पहले भूकंप की आशंका जताई गई थी, लेकिन बाद के वैज्ञानिक और सैटेलाइट विश्लेषणों में ग्लेशियर के एक हिस्से के टूटकर नीचे गिरने की बात सामने आई। इसके साथ बर्फ, चट्टान और मलबे का विशाल बहाव नदी घाटी में पहुंचा और देखते ही देखते पानी ने विकराल रूप धारण कर लिया।मलबे से भरे तेज बहाव ने बस्तियों, सड़कों, पुलों और अहम बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया। अब नई बैरियर झील ने राहत और बचाव अभियान के सामने एक और चुनौती खड़ी कर दी है।

भारत के भी सैकड़ों नागरिक लापता

इस आपदा का असर भारतीय नागरिकों पर भी पड़ा है। नेपाल के विदेश मंत्रालय की 27 अगस्त की आधिकारिक सूची में 178 भारतीय नागरिकों के लापता होने का विवरण था, जबकि बाद की भारतीय रिपोर्टों में संपर्क से बाहर भारतीयों की संख्या करीब 288-290 बताई गई है। आंकड़ों में बदलाव लगातार चल रहे रेस्क्यू और पहचान प्रक्रिया के कारण हो रहा है।नेपाल में विदेशी नागरिकों की बड़ी संख्या भी प्रभावित हुई है। आधिकारिक सूची में भारत के अलावा चीन, अमेरिका, यूक्रेन, मलेशिया, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा समेत कई देशों के नागरिक लापता बताए गए हैं।

बिहार भी हाई अलर्ट पर

नेपाल में नई आफत का खतरा बिहार के लिए भी गंभीर चिंता का सबब है। सीमा क्षेत्र में पहले ही बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। बिहार की एजेंसियां बैरियर झील में पानी के बढ़ते स्तर और संभावित टूटने के जोखिम पर नजर बनाए हुए हैं तथा संभावित आपात स्थिति के लिए तैयारियां कर रही हैं।ऐसे में नेपाल के लिए आने वाले 72 घंटे बेहद अहम हैं। एक तरफ मलबे में जिंदगी की तलाश जारी है, दूसरी तरफ पहाड़ों में जमा पानी नई तबाही का सबब बन सकता है। फिलहाल प्रशासन की सबसे बड़ी कोशिश यही है कि बैरियर झील के संभावित टूटने से पहले निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित किया जा सके।