रेल यातायात का नया अध्याय: पटना में गंगा नदी पर 1500 करोड़ की लागत से बना 'डबल-ट्रैक' पुल तैयार, अब 110 की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें
राजेंद्र सेतु के समानांतर बना नया डबल-ट्रैक रेल पुल निर्माण के 10 वर्षों बाद अब परिचालन के लिए तैयार है। लगभग 1,500 करोड़ रुपये की लागत से बने इस पुल के चालू होते ही मोकामा-बरौनी रेलखंड पर ट्रेनों को मिलने वाले 'आउटर सिग्नल' के झंझट और घंटों की देरी
Patna - उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच रेल कनेक्टिविटी को एक नई मजबूती मिलने जा रही है। मोकामा के ऐतिहासिक राजेंद्र सेतु के समानांतर बना नया डबल-ट्रैक रेल पुल निर्माण के 10 वर्षों बाद अब परिचालन के लिए तैयार है। लगभग 1,500 करोड़ रुपये की लागत से बने इस पुल के चालू होते ही मोकामा-बरौनी रेलखंड पर ट्रेनों की लेटलतीफी और 'आउटर सिग्नल' पर घंटों के इंतजार से यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
10 साल का लंबा इंतजार अब खत्म
इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना की आधारशिला वर्ष 2016 के जून महीने में रखी गई थी। गंगा की लहरों, जलस्तर की चुनौतियों और निर्माण के दौरान आई तकनीकी बाधाओं को पार करते हुए यह प्रोजेक्ट अब अपने अंतिम चरण में है। हालांकि इसकी डेडलाइन दिसंबर 2023 थी, लेकिन 10 साल के अंतराल के बाद अब यह पूरी तरह बनकर तैयार है। रेलवे सूत्रों के अनुसार, पुल के दोनों छोर अब हथिदह, टाल, रामपुर डुमरा और बरौनी स्टेशन से सफलतापूर्वक जुड़ चुके हैं।
आधुनिक तकनीक और स्टील स्लीपर का उपयोग
1.86 किलोमीटर लंबा यह मुख्य रेल पुल आधुनिक इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना है। इस पुल की सबसे बड़ी विशेषता इस पर लगाए गए स्टील के स्लीपर हैं। स्टील स्लीपर होने के कारण ट्रैक की मजबूती काफी बढ़ गई है, जिससे इस पर बिछाई गई पटरियों पर ट्रेनें 110 किमी/घंटा की अधिकतम रफ्तार से फर्राटा भर सकेंगी। यह पुराने पुल की तुलना में न केवल सुरक्षित है, बल्कि अधिक वजन वहन करने में भी सक्षम है।
दोहरी पटरियों से मिलेगी जाम से मुक्ति
वर्तमान में पुराने राजेंद्र सेतु पर केवल एक रेल लाइन होने के कारण ट्रेनों का संचालन 'सिंगल लाइन' के आधार पर होता है, जिससे ट्रेनों को एक-एक कर गुजारना पड़ता है। नए पुल के चालू होने से मोकामा-बरौनी रेलखंड पर दोहरी पटरियों पर एक साथ ट्रेनों का परिचालन संभव हो सकेगा। इससे ट्रेनों की संख्या में वृद्धि होगी और यात्री व मालगाड़ियों के यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे समयपालन (Punctuality) में बड़ा सुधार होगा।
14 किलोमीटर का विद्युतीकृत कॉरिडोर
नया पुल वर्तमान राजेंद्र पुल के समानांतर और पटना छोर की तरफ मात्र 60 मीटर की दूरी पर बना है। अप्रोच लाइन सहित इस पूरे प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 14 किलोमीटर है। यह पूरा रेलखंड डबल लाइन और पूरी तरह से विद्युतीकृत (Electrified) है। इसके चालू होने से न सिर्फ यात्री ट्रेनों को लाभ मिलेगा, बल्कि उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच मालगाड़ियों की आवाजाही में भी तेजी आएगी, जिससे व्यापारिक गतिविधियों को बल मिलेगा।
पुराने सेतु की सुरक्षा और यात्रियों को सीधा लाभ
नए पुल के शुरू होने से पुराने राजेंद्र सेतु पर रेल यातायात का भार काफी कम हो जाएगा। इससे पुराने पुल की संरचनात्मक सुरक्षा और सेवा अवधि (Life Span) को बढ़ाने में मदद मिलेगी। इस नए रेल नेटवर्क से पटना, बेगूसराय, खगड़िया, मुंगेर, सहरसा और आसपास के जिलों के लाखों यात्रियों को सीधा फायदा मिलेगा। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यह पुल बिहार के रेल नेटवर्क की क्षमता में ऐतिहासिक वृद्धि करेगा।
जल्द शुरू होगा ट्रेनों का परिचालन
दानापुर रेल मंडल के डीआरएम विनोद कुमार ने पुष्टि की है कि पुल का निर्माण कार्य पूरा हो गया है और जल्द ही इस पर ट्रेनों का परिचालन शुरू करने की योजना है। रेलवे की तैयारी है कि नए पुल पर अंतिम ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा होते ही इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाए। वर्तमान में हथिदह और बरौनी के बीच रेल कनेक्टिविटी को सुगम बनाने के लिए अंतिम तकनीकी निरीक्षण किए जा रहे हैं।