पटना के पास बस रहा डेढ़ गुना बड़ा नया पटना, स्कूल-मॉल से स्पोर्ट्स हब तक होंगी आधुनिक सुविधाएं

Patna Satellite Township: बिहार की राजधानी पटना के दक्षिणी हिस्से में एक ऐसा नया शहर आकार लेने जा रहा है, जिसका क्षेत्रफल मौजूदा पटना से करीब डेढ़ गुना होगा...

बस रहा है मौजूदा पटना से डेढ़ गुना बड़ा शहर- फोटो : social Media

Patna Satellite Township: बिहार की राजधानी पटना अब सिर्फ मौजूदा शहर तक सीमित नहीं रहने वाली। राजधानी के दक्षिणी हिस्से में एक ऐसा नया शहर आकार लेने जा रहा है, जिसका क्षेत्रफल मौजूदा पटना से करीब डेढ़ गुना और पटना नगर निगम क्षेत्र से लगभग तीन गुना बड़ा होगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का नाम पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप रखा गया है।सरकार की योजना सिर्फ जमीन पर कॉलोनियां बसाने की नहीं, बल्कि एक पूरी तरह नियोजित नए शहरी केंद्र के निर्माण की है। यहां करीब 66 लाख लोगों के रहने की क्षमता विकसित की जाएगी। स्कूल, अस्पताल, पार्क, मॉल, कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स, स्पोर्ट्स हब और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित करने की योजना है।पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप के लिए 81,730 एकड़ जमीन का क्षेत्र चिह्नित किया गया है। इसके मुकाबले पटना नगर निगम, दानापुर, खगौल, फुलवारी और संपतचक नगर निकायों का संयुक्त क्षेत्र करीब 54 हजार एकड़ है।यानी प्रस्तावित टाउनशिप का विस्तार मौजूदा पटना के प्रमुख शहरी निकायों के संयुक्त क्षेत्र से भी काफी बड़ा होगा। इतनी बड़ी जमीन पर नया शहर विकसित होने से राजधानी के आसपास शहरी विस्तार का एक नया अध्याय शुरू हो सकता है।

पाटलिपुत्र टाउनशिप के लिए चिह्नित इलाके में पुनपुन नगर पंचायत को पूरी तरह शामिल किया गया है। इसके अलावा नौबतपुर नगर पंचायत के कुछ वार्ड भी परियोजना का हिस्सा होंगे।पटना जिले के 9 प्रखंडों के 273 राजस्व गांवों को भी प्रस्तावित टाउनशिप में शामिल किया गया है। यानी यह परियोजना सिर्फ शहरी इलाके तक सीमित नहीं होगी, बल्कि बड़ी संख्या में ग्रामीण इलाकों को भी भविष्य के नए शहरी ढांचे से जोड़ेगी।

सरकार की परिकल्पना के मुताबिक पाटलिपुत्र टाउनशिप में लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को ध्यान में रखकर आधुनिक सुविधाओं का नेटवर्क तैयार किया जाएगा।यहां स्कूल और अस्पताल के साथ-साथ पार्क, शॉपिंग मॉल, कॉम्प्लेक्स, स्पोर्ट्स हब और मल्टी मॉडल हब विकसित किए जाने की योजना है। इसका मकसद ऐसा सुव्यवस्थित शहर तैयार करना है जहां आवास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन की सुविधाएं एक ही शहरी ढांचे में उपलब्ध हों।

पटना की आबादी और वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। शहर के भीतर जमीन सीमित होने के कारण ट्रैफिक, आवास और दूसरी शहरी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं।ऐसे में पाटलिपुत्र टाउनशिप को राजधानी के लिए एक नए शहरी विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। अगर परियोजना तय योजना के मुताबिक विकसित होती है तो पटना शहर पर बढ़ते आबादी के दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।इसके साथ ही राजधानी के दक्षिणी हिस्से में औद्योगिक और कारोबारी गतिविधियों के विस्तार का रास्ता भी खुल सकता है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है।

पाटलिपुत्र टाउनशिप अकेली परियोजना नहीं है। बिहार सरकार ने राज्य में कुल 12 सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना तैयार की है।राज्य के सभी 9 प्रमंडल मुख्यालयों के अलावा सीतामढ़ी, सोनपुर और डेहरी के पास भी नए शहर विकसित करने की योजना है। यानी सरकार बिहार के शहरी विकास को राजधानी से बाहर भी विस्तार देने की तैयारी में है।

नगर विकास एवं आवास विभाग ने पाटलिपुत्र टाउनशिप का प्रारूप प्रकाशित कर दिया है। इस प्रारूप पर आम लोगों से 30 सितंबर तक आपत्ति और सुझाव मांगे गए हैं।इसके बाद प्राप्त सुझावों और आपत्तियों के आधार पर आगे की प्रक्रिया बढ़ेगी।कुल मिलाकर पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप बिहार के शहरी नक्शे को बदलने वाली बड़ी परियोजना बन सकती है। 81,730 एकड़ का विस्तार और 66 लाख लोगों की क्षमता इसे सिर्फ पटना का विस्तार नहीं, बल्कि एक नए शहरी केंद्र के रूप में स्थापित करने की महत्वाकांक्षी कोशिश बनाता है। अगर योजना जमीन पर उसी रफ्तार से उतरती है, जिस रफ्तार से इसका खाका तैयार किया जा रहा है, तो आने वाले वर्षों में पटना की पहचान मौजूदा शहर से कहीं आगे तक फैल सकती है।