Bihar Cashless Treatment:रोड एक्सीडेंट पर सीएम नीतीश का बड़ा फैसला, सड़क हादसे में घायल के इलाज पर डेढ़ लाख तक खर्च करेगी सरकार

Bihar Cashless Treatment: अब सड़क हादसे में घायल होने पर मुआवज़े और इलाज का क़ायदा पूरी तरह बदल गया है। सरकार ने साफ़ कर दिया है कि दुर्घटना के बाद ज़ख़्मी को इलाज के लिए पैसों के इंतज़ाम में भटकना नहीं पड़ेगा।

रोड एक्सीडेंट पर सीएम नीतीश का बड़ा फैसला- फोटो : X

Bihar Cashless Treatment: अब सड़क हादसे में घायल होने पर मुआवज़े और इलाज का क़ायदा पूरी तरह बदल गया है। सरकार ने साफ़ कर दिया है कि दुर्घटना के बाद ज़ख़्मी को इलाज के लिए पैसों के इंतज़ाम में भटकना नहीं पड़ेगा। या तो सरकार एक हफ्ते तक उसका इलाज कराएगी, या फिर एकमुश्त डेढ़ लाख रुपये की मदद देगी। यही नहीं, इंसानियत दिखाते हुए घायल को सही-सलामत अस्पताल पहुंचाने वाले शख़्स को 25 हज़ार रुपये का इनाम भी मिलेगा। इस अहम फ़ैसले की जानकारी परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने मंगलवार को दी।

परिवहन मंत्री ने कहा कि सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए सरकार हर स्तर पर कोशिश कर रही है। इसी कड़ी में राज्य के उन छह ज़िलों को चिह्नित किया गया है, जहां सबसे ज़्यादा सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। ये जिले हैं पटना, नालंदा, मुजफ्फरपुर, सारण, मोतिहारी और गया। इन जिलों में “जीरो एक्सीडेंट” के लक्ष्य के साथ विशेष अभियान चलेगा। प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और परिवहन विभाग की संयुक्त बैठकों की तैयारी की जा रही है, ताकि ज़िम्मेदारी तय हो और लापरवाही पर नकेल कसी जा सके।

दुर्घटना के बाद घायल को तुरंत अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस नेटवर्क को भी मज़बूत किया जा रहा है। 2200 एंबुलेंस को 102 इमरजेंसी नंबर से टैग किया जा रहा है। पहले से 1500 एंबुलेंस इस सेवा से जुड़ी थीं, अब यह संख्या बढ़कर 3700 हो जाएगी। मक़सद साफ़ है घटना के बाद “गोल्डन आवर” में इलाज शुरू हो और जान बचाई जा सके।

नई योजना के तहत कुछ शर्तें भी तय की गई हैं। दुर्घटना सड़क पर हुई हो, घायल को सरकारी या सूचीबद्ध निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया हो और हादसे के सात दिन के भीतर इलाज शुरू होना ज़रूरी है। अस्पताल को दुर्घटना की जानकारी पोर्टल या सरकारी सिस्टम में दर्ज करनी होगी। इलाज का खर्च अधिकतम डेढ़ लाख रुपये तक सरकार वहन करेगी और भुगतान सीधे अस्पताल को किया जाएगा।

सबसे अहम बात यह कि जो शख़्स घायल को पहले अस्पताल पहुंचाएगा और पुलिस या आपातकालीन सेवा (112/108) को सूचना देगा, सत्यापन के बाद उसे 25 हज़ार रुपये डीबीटी के ज़रिए दिए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे सड़क हादसों के बाद मदद से पीछे हटने की मानसिकता टूटेगी।

इसी के साथ परिवहन विभाग ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी क़दम बढ़ाया है। राज्य के आठ जिलों में चल रही 100 पिंक बसों के लिए 250 महिला चालक और 250 महिला संवाहकों की नियुक्ति होगी। गणतंत्र दिवस पर गांधी मैदान में परिवहन विभाग की झांकी में छह महादलित महिला चालक पिंक बस चलाती नज़र आएंगी। सरकार का संदेश साफ़ है सुरक्षा, संवेदनशीलता और समावेशन, तीनों मोर्चों पर एक साथ कार्रवाई।

रिपोर्ट- अभिजीत सिंह